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भारत का ग्रेट-निकोबार प्रोजेक्ट! पहली बार हिंद महासागर में तैनात होगी अग्नि-प्राइम मिसाइल, टूटेगा चीन का स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स
Zee News
India's Great Nicobar Project: ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट के जरिए भारत मलक्का जलडमरूमध्य के पास अपनी रणनीतिक ताकत बढ़ा रहा है. इस योजना में सैन्य बुनियादी ढांचे का विस्तार और अग्नि-1 प्राइम जैसी मिसाइलों की तैनाती शामिल है. इसका मकसद हिंद महासागर में चीन की बढ़ती मौजूदगी का संतुलन बनाना और समुद्री सुरक्षा मजबूत करना है.
India's Great Nicobar Project: हिंद महासागर में भारत कंट्रोल बढ़ाने जा रहा है. इसके लिए नई रणनीति बनाई है. भारत समंदर में चीन के दबदबे को कम करने के लिए ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है. यही वजह है कि एक बार फिर से अंडमान निकोबार द्वीप चर्चा में है. ये द्वीप मल्लका स्ट्रेट स्थित है, जो दुनिया का सबसे बिजी समुद्री रास्ता है. यहां दुनिया के 80 प्रतिशत अधिक व्यापारिक जहाज गुजरते हैं. इसलिए इस इलाके का रणनीतिक महत्व बहुत अधिक है.

Rafale vs J-20 Mighty Dragon: राफेल और चीन के J-20 माइटी ड्रैगन के बीच तुलना में स्टील्थ बनाम सेंसर शक्ति की बहस तेज है. J-20 को रडार से बचने में बढ़त मिल सकती है, जबकि राफेल इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और सेंसर फ्यूजन में मजबूत है. आधुनिक हवाई युद्ध में नेटवर्क, मिसाइल रेंज और रणनीति निर्णायक भूमिका निभाते हैं.

India AI Impact Summit: यह समिट आम लोगों के लिए खुलेगा. इसमें दिखेगा कि AI असल जिंदगी में कैसे काम करता है. यह खेती, स्वास्थ्य, शिक्षा और डेली के समस्याओं को हल करने में मदद कर सकता है. Expo में 70000 वर्ग मीटर से बड़ा एरिया होगा. जिसमें 30 से अधिक देशों की 300+ कंपनियां अपने AI प्रोडक्ट्स और टेक्नोलॉजी दिखाएंगी. छात्रों के लिए YUVAi और AI for ALL जैसे प्रोग्राम होंगे.

Vibhav Anti-Tank Mines: विभव माइन को खास तौर पर मोबिलिटी किल यानी दुश्मन टैंक को पूरी तरह नष्ट करने के लिए नहीं बनाया गया है. बल्कि उसकी गति रोकने के लिए डिजाइन किया गया है. यह टैंक के ट्रैक, सस्पेंशन या ड्राइव सिस्टम को नुकसान पहुंचाकर उसे वहीं रोक देती है. इससे वह आगे बढ़ने में असमर्थ हो जाता है. इससे आसान निशाना बन जाता है.

DISC 12 Helicopter Landing System: भारत में हेलिकॉप्टर अक्सर पहाड़ी इलाकों, अग्रिम चौकियों और अस्थायी हेलिपैड पर उतरते हैं. जहां बुनियादी ढांचा बहुत कम होता है. ऐसे स्थानों पर पायलट अधिकतर दृश्य संकेतों के आधार पर लैंडिंग करते हैं. लेकिन कोहरा, धूल, बर्फबारी या खराब मौसम की स्थिति में यह तरीका जोखिम भरा हो सकता है.

Boeing P-8I Neptune Aircraft: Boeing P-8I Neptune विमानों की अतिरिक्त खरीद की जा रही है. इससे लंबी दूरी की एंटी-सबमरीन वॉरफेयर (ASW), समुद्री निगरानी और समुद्री हमले की क्षमता को मजबूत करेगी. यह विमान अमेरिकी कंपनी Boeing द्वारा बनाए जाते हैं. इन 6 विमानों के शामिल होने के बाद भारतीय नौसेना के पास कुल 18 P-8I विमान हो जाएंगे. इससे भारत, अमेरिका के बाद, इस विमान परिवार का दूसरा सबसे बड़ा ऑपरेटर बन जाएगा.








