)
अब रॉकेट से होगा सर्जिकल स्ट्राइक! DRDO बढ़ा रहा है कारगिल के हीरो 'पिनाका' की रेंज, 300 और 450 KM होगी मारक क्षमता
Zee News
DRDO Pinaka guided rocket: DRDO अपनी 'पिनाका' मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्च सिस्टम की रेंज में इजाफा करने की प्लानिंग बना रहा है. जिसके बाद भारत के पास अब 300 किलोमीटर और 450 किलोमीटर की मारक क्षमता वाले लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट होंगे.
DRDO Pinaka guided rocket: भारत की सैन्य ताकत में एक ऐसा जबरदस्त इजाफा होने जा रहा है, जो दुश्मन के खेमे में खलबली मचा देगा. भारत अब अपनी 'पिनाका' रॉकेट प्रणाली को इतना घातक बनाने जा रहा है कि यह सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठे दुश्मन को पलक झपकते ही मिट्टी में मिला देगी. DRDO अब 300 किलोमीटर और 450 किलोमीटर की रेंज वाले रॉकेट विकसित करने की तैयारी में है, जो सीधे तौर पर भारत की नई 'रॉकेट फोर्स' की रीढ़ बनेंगे. ऐसे में आइए जानते हैं DRDO की पूरी प्लानिंग और वह इस मुकाम को कैसे हासिल करेगी. :देश-दुनिया, जियो-पॉलिटिक्स, इंडियन आर्मी, इंडियन एयरफोर्स, इंडियन नेवी, हथियारों और डिफेंस की दुनिया की सभी खबरें अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें ऐप

Rafale vs J-20 Mighty Dragon: राफेल और चीन के J-20 माइटी ड्रैगन के बीच तुलना में स्टील्थ बनाम सेंसर शक्ति की बहस तेज है. J-20 को रडार से बचने में बढ़त मिल सकती है, जबकि राफेल इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और सेंसर फ्यूजन में मजबूत है. आधुनिक हवाई युद्ध में नेटवर्क, मिसाइल रेंज और रणनीति निर्णायक भूमिका निभाते हैं.

India AI Impact Summit: यह समिट आम लोगों के लिए खुलेगा. इसमें दिखेगा कि AI असल जिंदगी में कैसे काम करता है. यह खेती, स्वास्थ्य, शिक्षा और डेली के समस्याओं को हल करने में मदद कर सकता है. Expo में 70000 वर्ग मीटर से बड़ा एरिया होगा. जिसमें 30 से अधिक देशों की 300+ कंपनियां अपने AI प्रोडक्ट्स और टेक्नोलॉजी दिखाएंगी. छात्रों के लिए YUVAi और AI for ALL जैसे प्रोग्राम होंगे.

Vibhav Anti-Tank Mines: विभव माइन को खास तौर पर मोबिलिटी किल यानी दुश्मन टैंक को पूरी तरह नष्ट करने के लिए नहीं बनाया गया है. बल्कि उसकी गति रोकने के लिए डिजाइन किया गया है. यह टैंक के ट्रैक, सस्पेंशन या ड्राइव सिस्टम को नुकसान पहुंचाकर उसे वहीं रोक देती है. इससे वह आगे बढ़ने में असमर्थ हो जाता है. इससे आसान निशाना बन जाता है.

DISC 12 Helicopter Landing System: भारत में हेलिकॉप्टर अक्सर पहाड़ी इलाकों, अग्रिम चौकियों और अस्थायी हेलिपैड पर उतरते हैं. जहां बुनियादी ढांचा बहुत कम होता है. ऐसे स्थानों पर पायलट अधिकतर दृश्य संकेतों के आधार पर लैंडिंग करते हैं. लेकिन कोहरा, धूल, बर्फबारी या खराब मौसम की स्थिति में यह तरीका जोखिम भरा हो सकता है.

Boeing P-8I Neptune Aircraft: Boeing P-8I Neptune विमानों की अतिरिक्त खरीद की जा रही है. इससे लंबी दूरी की एंटी-सबमरीन वॉरफेयर (ASW), समुद्री निगरानी और समुद्री हमले की क्षमता को मजबूत करेगी. यह विमान अमेरिकी कंपनी Boeing द्वारा बनाए जाते हैं. इन 6 विमानों के शामिल होने के बाद भारतीय नौसेना के पास कुल 18 P-8I विमान हो जाएंगे. इससे भारत, अमेरिका के बाद, इस विमान परिवार का दूसरा सबसे बड़ा ऑपरेटर बन जाएगा.








