
Prayagraj: अद्भुत है Railway का सबसे बड़ा Operation Control Centre, खूबियां जानकर होगा गर्व
Zee News
World’s 2nd largest Operation Control Centre for DFC in Prayagraj: कंट्रोल रूम से ट्रेनों के संचालन के साथ ट्रैक की गड़बड़ी का भी पता चल सकेगा. फाल्ट आते ही उसकी लोकेशन और डिटेल स्क्रीन पर दिखेगी. फिर नजदीक में मौजूद पेट्रोलिंग टीम भेजकर फाल्ट को फौरन दूर किया जा सकेगा.
नई दिल्ली: भारत में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हाईटेक रेल कंट्रोल सेंटर का निर्माण हुआ है. करीब 4.5 एकड़ एरिया में तैयार हुआ ये कंट्रोल रूम प्रयागराज में बना है. कंट्रोल रूम का देश के सबसे महत्वाकांक्षी रेलवे प्रोजेक्ट डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से जुड़ा है. ईस्टर्न कॉरिडोर पर मौजूद ये देश का सबसे बड़ा रेलवे कंट्रोल रूम है. कई खूबियों से लैस ये कंट्रोल रूम देश का सबसे बड़ा मॉडर्न और हाईटेक सेंटर है जिसके निर्माण में 75 करोड़ से ज्यादा की लागत आई है. आपको बता दें कि देश में इस वक्त पहले चरण में दो कॉरिडोर तैयार किये जा रहे है ईस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर जो 1875 किलोमीटर लंबा लुधियाना से दानकुनी बंगाल तक है. वहीं वेस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर नोएडा के दादरी से मुंबई पोर्ट तक बन रहा है जिसकी लंबाई 1504 किलोमीटर है. इन दोनों गलियारों को पूरा करने के लिए युद्धस्तर पर काम चल रहा है.
Rafale vs J-20 Mighty Dragon: राफेल और चीन के J-20 माइटी ड्रैगन के बीच तुलना में स्टील्थ बनाम सेंसर शक्ति की बहस तेज है. J-20 को रडार से बचने में बढ़त मिल सकती है, जबकि राफेल इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और सेंसर फ्यूजन में मजबूत है. आधुनिक हवाई युद्ध में नेटवर्क, मिसाइल रेंज और रणनीति निर्णायक भूमिका निभाते हैं.

India AI Impact Summit: यह समिट आम लोगों के लिए खुलेगा. इसमें दिखेगा कि AI असल जिंदगी में कैसे काम करता है. यह खेती, स्वास्थ्य, शिक्षा और डेली के समस्याओं को हल करने में मदद कर सकता है. Expo में 70000 वर्ग मीटर से बड़ा एरिया होगा. जिसमें 30 से अधिक देशों की 300+ कंपनियां अपने AI प्रोडक्ट्स और टेक्नोलॉजी दिखाएंगी. छात्रों के लिए YUVAi और AI for ALL जैसे प्रोग्राम होंगे.

Vibhav Anti-Tank Mines: विभव माइन को खास तौर पर मोबिलिटी किल यानी दुश्मन टैंक को पूरी तरह नष्ट करने के लिए नहीं बनाया गया है. बल्कि उसकी गति रोकने के लिए डिजाइन किया गया है. यह टैंक के ट्रैक, सस्पेंशन या ड्राइव सिस्टम को नुकसान पहुंचाकर उसे वहीं रोक देती है. इससे वह आगे बढ़ने में असमर्थ हो जाता है. इससे आसान निशाना बन जाता है.

DISC 12 Helicopter Landing System: भारत में हेलिकॉप्टर अक्सर पहाड़ी इलाकों, अग्रिम चौकियों और अस्थायी हेलिपैड पर उतरते हैं. जहां बुनियादी ढांचा बहुत कम होता है. ऐसे स्थानों पर पायलट अधिकतर दृश्य संकेतों के आधार पर लैंडिंग करते हैं. लेकिन कोहरा, धूल, बर्फबारी या खराब मौसम की स्थिति में यह तरीका जोखिम भरा हो सकता है.









