
Pradosh Vrat 2022: सिद्धि योग-हस्त नक्षत्र में वैशाख का दूसरा प्रदोष व्रत, जानें पूजा का अबूझ मुहूर्त
AajTak
हिन्दू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व बताया गया है. इस दिन पूरी निष्ठा से भगवान शिव की अराधना करने से मनुष्य के सारे कष्ट दूर हो सकते हैं. मृत्यु के बाद उसे मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है. पुराणों के अनुसार, एक प्रदोष व्रत करने का फल दो गायों को दान जितना होता है.
हिंदू पंचांग के अनुसार हर महीने में त्रयोदशी तिथि दो बार पड़ती है. पहली शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि और दूसरी कृष्ण पक्ष की. दोनों त्रयोदशी तिथियां भगवान शिव को समर्पित होती हैं. इस तिथि पर भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. इन्हें प्रदोष के नाम से भी जाना जाता है. वैशाख माह का पहला प्रदोष व्रत 28 अप्रैल को था और अब दूसरा प्रदोष व्रत 13 मई को पड़ रहा है. शुक्रवार के दिन त्रयोदशी तिथि होने के कारण इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाएगा.
प्रदोष व्रत का महत्व हिन्दू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व बताया गया है. इस दिन पूरी निष्ठा से भगवान शिव की अराधना करने से मनुष्य के सारे कष्ट दूर हो सकते हैं. मृत्यु के बाद उसे मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है. पुराणों के अनुसार, एक प्रदोष व्रत करने का फल दो गायों को दान जितना होता है. इस व्रत के महत्व को वेदों के महाज्ञानी सूतजी ने गंगा नदी के तट पर शौनकादि ऋषियों को बताया था. उन्होंने कहा था कि कलयुग में जब अधर्म का बोलबाला रहेगा. लोग धर्म के रास्ते को छोड़ अन्याय की राह पर जा रहे होंगे. उस समय प्रदोष व्रत एक माध्यम बनेगा जिसके जरिए वो शिव की अराधना कर अपने पापों का प्रायश्चित कर पाएंगे.
प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त वैशाख माह के दूसरे प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 07 बजकर 04 मिनट से लेकर रात 09 बजकर 09 मिनट तक रहेगा. इस दिन शाम करीब 3 बजकर 45 मिनट से सिद्धि योग लग रहा है और हस्त नक्षत्र रहेगा. ये दोनों ही मांगलिक एवं शुभ कार्यों के लिए अच्छे माने जाते हैं.
सोम प्रदोष व्रत की पूजा विधि किसी भी प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा सूर्यास्त से 45 मिनट पहले और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक की जाती है. सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें. हल्के लाल या गुलाबी रंग का वस्त्र धारण करना शुभ रहता है. चांदी या तांबे के लोटे से शुद्ध शहद एक धारा के साथ शिवलिंग पर अर्पण करें. उसके बाद शुद्ध जल की धारा से अभिषेक करें तथा ॐ सर्वसिद्धि प्रदाये नमः मन्त्र का 108 बार जाप करें. आज के दिन महामृत्युंजय मंत्र का जाप जरूर करना चाहिए.

सैकड़ों साल पहले तबाह हो चुके एक रोमन शहर की दीवार पर करीब 2000 साल पुराने लव लेटर्स लिखे हुए मिले हैं. यह खोज आज की उन्नत और आधुनिक तकनीक का नतीजा है. क्योंकि, जिस दीवार पर ये ग्रैफिटी बने थे, वो काफी पहले खुदाई में मिल गए थे, लेकिन उन पर उकेरे गए भित्तिचित्रों को समझना मुश्किल था. अब जाकर पुरातत्वविदों को इसका मतलब पता चला है.

Shani Nakshatra Gochar 2026: शनि जब रेवती नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो इसका प्रभाव धीरे-धीरे लेकिन गहराई से देखने को मिलता है. रेवती नक्षत्र मीन राशि का अंतिम नक्षत्र माना जाता है और इसका स्वामी बुध ग्रह है. इसलिए इस अवधि में सोच-समझ, योजना, संवाद और निर्णय क्षमता से जुड़े मामलों में खास बदलाव दिखाई दे सकते हैं.

Aaj 20 February 2026 का पंचांग (Aaj ka Panchang): 20 फरवरी 2026, दिन- शुक्रवार, फाल्गुन मास, शुक्ल पक्ष, तृतीया तिथि 14.38 बजे तक फिर चतुर्थी तिथि, उत्तर भाद्रपद नक्षत्र 20.07 बजे तक रेवती नक्षत्र, चंद्रमा- मीन में, सूर्य- कुंभ में, अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12.12 बजे से दोपहर 12.58 बजे तक, राहुकाल- सुबह 11.10 बजे से दोपहर 12.35 बजे तक, दिशा शूल- पश्चिम.










