
MSP पर कमेटी के सवालों को सरकार ने टाला, संयुक्त किसान मोर्चा ने लगाए आरोप
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Sanyukt kisan morcha on MSP committee: संयुक्त किसान मोर्चा का आरोप है कि सरकार एमएसपी पर गठित कमेटी में शामिल दूसरे लोगों के नाम और कमेटी का कार्यकाल कितना होगा? जैसी तमाम बातें साफ नहीं कर रही है.
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने शुक्रवार को आरोप लगाए कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर कमेटी के सवालों को केंद्र सरकार टाल रही है. कृषि कानूनों के खिलाफ लंबा प्रदर्शन करने वाले मोर्चा ने तब तक एमएसपी कमेटी के लिए नाम देने से मना किया है, जब तक यह साफ नहीं हो जाता कि इस कमेटी में कौन-कौन होंगे और यह कैसे काम करेगी.
आरोप है कि सरकार ने दिसंबर के महीने से समिति के गठन के लिए कोई कदम नहीं उठाया. एसकेएम ने सरकार के वादों को पूरा न करने के विरोध में 31 जनवरी को 'विश्वासघात दिवस' भी मनाया था. किसान मोर्चा के मुताबिक, उसके बाद केंद्र ने अपनी निष्क्रियता का बचाव करने के लिए आचार संहिता का बहाना दिया. हालांकि, चुनावी आचार संहिता ऐसे पूर्व-घोषित निर्णय के कार्यान्वयन पर रोक नहीं लगाती है.
SKM के अनुसार, आखिर 22 मार्च को संयुक्त किसान मोर्चा समन्वय समिति के सदस्य युद्धवीर सिंह को कृषि सचिव संजय अग्रवाल ने फोन कॉल किया, जिसमें भारत सरकार की तरफ से गठित कमेटी के लिए एसकेएम से 2 से 3 नाम मांगे गए. किसान नेताओं का कहना है कि इस मौखिक संदेश से यह कुछ साफ नहीं हुआ कि इस कमेटी में और किन्हें शामिल किया जाएगा? इसका काम (मैंडेट) और कार्यकाल क्या होगा और यह कैसे काम करेगी?
आखिकार संयुक्त किसान मोर्चा ने 24 मार्च को संजय अग्रवाल को ईमेल भेजकर ( 25 मार्च को दोपहर 12:08 बजे) इन 5 बिंदुओं पर स्पष्टीकरण देने का अनुरोध किया:
1. इस समिति का टीओआर (Terms of Reference) क्या होगा? 2. संयुक्त किसान मोर्चा के अलावा और कौन से संगठन, व्यक्ति और पदाधिकारी इस समिति में शामिल होंगे? 3. समिति का अध्यक्ष कौन होगा और इसकी कार्यप्रणाली क्या होगी? 4. समिति को अपनी रिपोर्ट जमा करने के लिए कितना समय मिलेगा? 5. क्या समिति की सिफारिश सरकार के लिए बाध्यकारी होगी?
एसकेएम के अनुसार, यह ईमेल 30 मार्च को दोबारा भेजा गया, लेकिन आज तक कोई जवाब नहीं मिला है. मोर्चा का कहना है कि एमएसपी पर कमेटी का गठन स्पष्ट और सहमत शर्तों पर किया जाना चाहिए. एसकेएम ने एक बार फिर सरकार से कमेटी की डिटेल की मांग की है. किसान संगठन का कहना है कि जब तक हम इस कमेटी के स्वरूप और कार्यसूची से पूरी तरह वाकिफ नहीं होंगे, तब तक ऐसी किसी समिति में भाग लेना सार्थक नहीं होगा.

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