
Indian Railways: ट्रेन में ड्राइवर को आ जाए नींद या खराब हो जाए तबीयत तो क्या होगा? दुर्घटना रोकने के लिए क्या है सिस्टम?
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Indian Railways: अगर किसी भी हालात में ड्राइवर की तबीयत खराब हो जाए या फिर वह सो जाए और असिटेंट ड्राइवर भी ट्रेन चलाने में असमर्थ हो, तब भी ट्रेन में परिचालन और किसी हादसे की संभावना नहीं है, क्योंकि रेलवे का ऑटोमेटिक सिस्टम हर तरह से तैयार है.
What will happen if Train Driver will sleep: रेलवे का नेटवर्क इतना बड़ा है कि गलतियों की गुंजाइश न के बराबर होती है. एक सवाल अधिकतर यात्रियों के दिमाग में यात्रा करते समय आता है कि अगर यात्रा के दौरान ड्राइवर की तबीयत खराब हो जाए या फिर उसको कुछ हो जाए तो ऐसे परिस्थिति में ट्रेन का संचालन कौन करेगा और आगे क्या होगा?
असल में रेलवे ने इस परिस्थिति से निपटने के लिए पहले ही व्यवस्था कर रखी है. अगर ड्राइवर की तबीयत खराब होती है या उसको नींद आ जाती है तो ऐसी परिस्थिति में ड्राइवर की जगह असिटेंट ड्राइवर ट्रेन की कमान संभालेगा. वह ट्रेन को अपने अधिकार में ले लेगा और आपात स्थिति में वह ट्रेन को अगले स्टेशन तक ले जाएगा और फिर उसे रोक देगा. यानी हर ट्रेन में ड्राइवर की मदद के लिए असिटेंट ड्राइवर भी होता है.
अब सवाल उठता है कि अगर दोनों ड्राइवर ट्रेन चलाने की स्थिति में नहीं हैं और दोनों की तबीयत खराब हो गई है तो तब भी यात्रियों को परेशान होने की जरूरत नहीं है. रेलवे ने इसके लिए एक सिस्टम तैयार किया है. रेलवे ने हर इंजन में एक डिवाइस लगाई है, जिसको विजीलेंस कंट्रोल डिवाइस कहते है. इस डिवाइस में कंट्रोल रूम की तरफ से सिग्नल दिए जाते हैं.
अगर ड्राइवर एक मिनट में कोई प्रतिक्रिया नहीं देता है तो यह एक तरह का अलार्म नोटिफिकेशन भेजता है. ड्राइवर अगर अगले 17 सेकंड में रिस्पॉन्स नही करता है तो ऐसे में ट्रेन में ऑटोमेटिक ब्रेक लगने शुरू हो जाते हैं. और कंट्रोल रूम को इसकी जानकारी तुरंत मिल जाती है कि ट्रेन ड्राइवर के सही ऑपरेट नहीं होने की वजह से रोकी गई है.
ऐसे में अगर किसी भी हालात में ड्राइवर की तबीयत खराब हो जाए. वह सो जाए और असिटेंट ड्राइवर भी ट्रेन चलाने में असमर्थ हो, तब भी ट्रेन में परिचालन और किसी हादसे की संभावना नहीं है, क्योंकि रेलवे का ऑटोमेटिक सिस्टम हर तरह से तैयार है.

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