
IIT हैदराबाद में डायरेक्ट पीएचडी प्रोग्राम के लिए आवेदन शुरू, GATE भी जरूरी नहीं!
AajTak
आईआईटी हैदराबाद 2025 अपने डायरेक्ट पीएचडी प्रोग्राम के लिए आवेदन आमंत्रित कर रहा है. यह कार्यक्रम प्रतिष्ठित फेलोशिप प्रदान करता है और इसके लिए GATE योग्यता की आवश्यकता नहीं है. इच्छुक उम्मीदवारों को 15 नवंबर 2024 की अंतिम तिथि तक अपने आवेदन जमा करने होंगे.
आईआईटी हैदराबाद अब 2025 एकेडमिक इयर के लिए डायरेक्ट प्रत्यक्ष पीएचडी कार्यक्रम के लिए आवेदन स्वीकार कर रहा है. यह प्रोग्राम प्रतिभाशाली व्यक्तियों को एक गतिशील शैक्षणिक वातावरण में अपने शोध करियर को आगे बढ़ाने का एक असाधारण अवसर प्रदान करता है.
यह प्रोग्राम उन असाधारण छात्रों को लक्षित करता है, जिन्होंने IIT, NIT, IISc, IISER और CFTI जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से BTech, BE, BDes या MSc की डिग्री में 9.0 या उससे अधिक का CGPA हासिल किया है. उल्लेखनीय रूप से, उम्मीदवारों को आवेदन करने के लिए GATE स्कोर की आवश्यकता नहीं है. संभावित आवेदकों को विस्तृत आवेदन निर्देशों और समय सीमा के लिए आधिकारिक IIT हैदराबाद वेबसाइट पर जाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है.
डायरेक्ट पीएचडी प्रोग्राम आवेदन की अंतिम तिथि 15 नवंबर, 2024 निर्धारित की गई है. यह प्रोग्राम उच्च उपलब्धि वाले छात्रों को एक सहायक शैक्षणिक वातावरण में अत्याधुनिक शोध में संलग्न होने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है. आईआईटी हैदराबाद जूनियर रिसर्च फेलो (जेआरएफ) स्तर पर पहले दो वर्षों के लिए 50,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है, इसके बाद सीनियर रिसर्च फेलो (एसआरएफ) स्तर पर अगले तीन वर्षों के लिए 55,000 रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी.
इन विभागों में कर सकेंगे आवेदन: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बायोमेडिकल इंजीनियरिंग बायो टेक्नोलॉजी केमिकल इंजीनियरिंग क्लाइमेट चेंज कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग डिजाइन इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग एंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट मेटेरियल साइंस एंड मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग मेकेनिकल एअरोस्पेस इंजीनियरिंग
कैसे होगा चयन इस प्रक्रिया के तहत सभी विभाग आवेदन पत्रों के आधार पर उन एप्लीकेशन को चयन करेंगे जो कि बिना GATE परीक्षा के पीएचडी में दाखिला लेने की अर्हता पूरी करते हैं. इसमें किसी तरह की परीक्षा आदि की व्यवस्था नहीं की गई है.

आज पूरी दुनिया LNG पर निर्भर है. खासकर भारत जैसे देश, जहां घरेलू गैस प्रोडक्शन कम है, वहां LNG आयात बेहद जरूरी है. लेकिन जैसे ही युद्ध या हमला होता है, सप्लाई चेन टूट जाती है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. कतर जैसे देशों से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर पहुंचने तक यह गैस कई तकनीकी प्रोसेस और जोखिम भरे रास्तों से गुजरती है.












