
Holi Celebration 2021: सूफी मठों और शाही दरबारों में होली मनाने का इतिहास, कहा जाता था ईद-ए-गुलाबी
Zee News
मुगलिया सल्तनत के आखिरी ताजदार बहादूर शा ज़फ़र ने होली को लाल किले का शाही उत्सव बना दिया था. बहादूर शा ज़फ़र ने होली के लिए उर्दू में कई गीत भी लिखे.
नई दिल्ली: तारीख़ बताती है कि सूफी संतों के मठों और मुस्लिम बादशाहों के शाही दरबारों में जमकर होली मनाई जाती थी. सूफी संतों में ख्वाजा निजामुद्दीन औलिया ने सब से पहले इसकी शुरुआत अपनी ख़ानक़ाह (मठ) में की, जबकि बादशाहों में अकबर के दरबार में होली मनाने का जिक्र इतिहास के पन्नों में जली हर्फों में दर्ज है. उस वक्त इस होली को ईद-ए-गुलाबी और रंगों के त्योहार के नाम से जाना जाता था. बहुत सारे मुस्लिम शायरों ने अपनी शायरी और इतिहासकारों ने अपनी किताब में लिखा है कि दिल्ली सल्तनत या मुगलकाल के दौरान सबसे पहले सूफी संतों ने होलो खेलने की शुरुआता की और वे अपनी ख़ानक़ाहों में बाज़ाब्ता होली का एहतमाम करते थे.
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