
Happy New Year 2022: नए साल की 3 सबसे लकी राशियां, हर मामले में मिलेगा किस्मत का साथ, देखिए आपकी राशि है या नहीं?
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Lucky Zodiac Signs in 2022: नया साल नई उम्मीदें लेकर आ रहा है. ज्योतिषविदों के अनुसार, ये साल मुख्य रूप से तीन राशियों के लिए लकी साबित होने वाला है. इन राशियों को जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलेगी. जैसे कुंभ राशि उन कुछेक राशियों में शामिल है, जिनके लिए साल 2022 विशेष रूप से अनुकूल रहने वाला है. इस राशि के जातकों को आर्थिक सफलता तो मिलेगी ही, साथ ही उनकी सेहत भी अच्छी रहेगी.
Lucky Zodiac Sign 2022: नया साल सबके लिए नई उम्मीदें लेकर आता है. हर व्यक्ति बीते साल के कड़वे अनुभवों को भुलाकर नए साल का स्वागत इस सकारात्मक उम्मीद से करता है कि नए साल में उसके साथ सबकुछ अच्छा होगा. कई बार नया साल हमारे लिए बेहद अच्छा साबित होता है तो कई बार हमारी खुशियों पर पानी फिर जाता है.

Gupt Navratri 2026: माघ गुप्त नवरात्र की आज से शुरुआत हो चुकी है, जो 28 जनवरी तक चलेंगे. गुप्त नवरात्र के दौरान मां दुर्गा के गुप्त तरीके से उपासना की जाती है. इस नवरात्र में मां दुर्गा की 10 महाविद्याओं जैसे मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी माता, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां धूम्रवती माता, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा की जाती है.

चीन में पढ़ाई कर रहे ली नाम के एक छात्र ने अपने खाली समय का सही इस्तेमाल करते हुए वयस्कों और बच्चों को साइकिल चलाना सिखाना शुरू किया. लोगों की जरूरत को समझकर उसने ट्रेनिंग पैकेज बनाया और सोशल मीडिया के जरिए प्रचार किया. सिर्फ दो साल में उसने करीब 700 लोगों को साइकिल चलाना सिखाया और 35 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई कर ली.

Aaj 19 January 2026 का पंचांग (Aaj ka Panchang): 19 जनवरी 2026, दिन- सोमवार , माघ मास, शुक्ल पक्ष, प्रतिपदा तिथि , उत्तराषाढ़ा नक्षत्र सुबह 11.52 बजे तक फिर श्रवण नक्षत्र, चंद्रमा- मकर में, सूर्य- मकर में, अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12.11 बजे से दोपहर 12.53 बजे तक, राहुकाल- सुबह 08.34 बजे से सुबह 09.53 बजे तक, दिशा शूल- पूर्व.

ईरान वर्तमान में एक इस्लामिक रिपब्लिक है. वहां इस्लाम धर्म के कायदे-कानून के मुताबिक देश चलता है. इसके तहत समाज में कई तरह के परहेज भी हैं और इनके अनुपालन को लेकर वहां मॉरल पुलिसिंग की भी तगड़ी व्यवस्था है. इन दिनों वहां क्या हो रहा है किसी से कुछ छिपा नहीं है. लोग ऐसी शासन व्यवस्था के विरोध में सड़कों पर हैं. ऐसा ही कुछ हाल अफगानिस्तान के तालिबान शासन में भी है. लेकिन, इन दोनों देशों में 60 और 70 के दशक में ऐसे हालात नहीं थे.









