
देवी का पहला अवतार क्या है, कौन हैं दो असुर जो आज भी हमारे कान में जिंदा हैं?
AajTak
नवरात्र के पांचवें दिन देवी स्कंदमाता की पूजा की जाती है, लेकिन देवी का पहला स्वरूप देवी सरस्वती का था, जो ज्ञान की देवी हैं. मार्कंडेय पुराण के अनुसार, देवी त्रिपुरसुंदरी ने अपने अंश से ब्राह्मी, महालक्ष्मी और महाकाली को प्रकट किया, जिनमें ब्राह्मी स्वरूप देवी सरस्वती हैं.
नवरात्र के पांचवें दिन देवी स्कंदमाता के स्वरूप के पूजा की जा रही है. स्कंद भगवान कार्तिकेय का एक नाम है, जो शिव और पार्वती के पुत्र हैं. कार्तिकेय की मां के रूप में देवी सारे संसार की ही माता हैं. लेकिन सवाल है देवी का कौन सा स्वरूप सबसे पहले प्रकट हुआ था, वह किस रूप में पहली बार सामने आई थीं?
कैसे प्रकट हुआ देवी का पहला स्वरूप? इसका जवाब मार्कंडेय पुराण के सप्तशती से मिलता है. श्री दुर्गा सप्तशती में देवी के पहले स्वरूप का जिक्र मिलता है. इसके अनुसार देवी ललिता त्रिपुर सुंदरी ने अपने ही अंश से तीन महाशक्तियों को प्रकट किया. उन्होंने ब्रह्माजी के लिए अपना सत्य अंश ब्राह्मी प्रकट किया. यही विद्या का स्वर रूप है जिसे सरस्वती कहते हैं. फिर उन्होंने अपने रजोगुण से देवी महालक्ष्मी को प्रकट किया और तीसरी शक्ति जो खुद कालस्वरूपा थी उससे महाकाली को प्रकट किया. देवी त्रिपुर सुंदरी ही अलग-अलग अंशों के रूप में विभक्त होकर ब्रह्ना-विष्णु और महेश की शक्ति बनकर सहायता करती हैं.
विद्या स्वरूप देवी सरस्वती पहले हुईं प्रकट इस तरह इन तीनों शक्तियों को उन्होंने ब्रह्मा-विष्णु महेश को सौंपा जो उनके भीतर ही उनकी शक्ति और चेतना बनकर समा गई. इसीलिए हम इन तीनों शक्तियों को आसानी से समझने के लिए ब्रह्मा-विष्णु और शिव की पत्नी भी कह देते हैं. इस तरह देखा जाए तो देवी का पहला प्रकट स्वरूप तीनों महाविद्या का है. इसमें भी उन्होंने देवी सरस्वती को पहले प्रकट किया.
कहां से शुरू होती है दुर्गा सप्तशती की कहानी देवी सरस्वती जो सभी तरह के ज्ञान की देवी हैं, उसी ज्ञान के रूप में वह भगवान विष्णु के मस्तक के बीच उनकी स्मृति (याद्दाश्त) बनकर रहती हैं. जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में लीन होते हैं तो देवी उनके मस्तक के बीच आज्ञा चक्र में स्थित होकर सारे संसार का ध्यान रखती हैं और योगमाया कहलाती हैं. इन योगमाया का प्रकट स्वरूप कैसे सामने आया, दुर्गा सप्तशती की कहानी यहीं से शुरू होती है.
सबसे पहले दैत्य थे मधु-कैटभ कहानी कुछ ऐसी है कि प्रलय के बाद जब सृष्टि एक बार फिर स्थिर हुई और सृजन की शुरुआत होने को हुई, ठीक इसी समय रज और तमोगुण के असंतुलन के कारण दो दैत्यों का जन्म हुआ. विष्णु पुराण के अनुसार भगवान विष्णु के कान के मैल से मधु जन्मा और पसीने से कैटभ. इन मधु और कैटभ ने चारों ओर जल ही जल देखा तो वह उसमें खेलने लगे और शोर मचाने लगे. इस तरह का कोलाहल सुनकर ब्रह्म देव के सृष्टि निर्माण के कार्य में बाधा आने लगी तो उन्होंने आंख खोलकर देखा कि दो दैत्य क्षीरसागर में शोर मचा रहे हैं. ब्रह्मदेव उन्हें रोकने आए तो मधु और कैटभ उन्हें ही खाने के लिए दौड़ पड़े.

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने इंटरमीडिएट 2026 के नतीजे घोषित कर दिए हैं और इस बार साइंस स्ट्रीम (Science Stream) में समस्तीपुर के आदित्य प्रकाश अमन ने पूरे राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त कर इतिहास रच दिया है. रिजल्ट की खबर मिलते ही आदित्य के घर और स्कूल में जश्न का माहौल है. उनकी इस सफलता ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे जिले का मान बढ़ाया है.

Chaitra Navratri 2026: नवरात्र हिंदू धर्म का सबसे बड़ा आस्था और भक्ति का पर्व है. मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए भक्त नौ दिनों तक कठिन उपवास रखते हैं. लेकिन कई बार किसी हेल्थ इश्यू या अनजाने में हुई गलती के कारण व्रत टूट जाता है. ऐसे में आज हम आपको कुछ विशेष उपाय बताएंगे, जिन्हें करके व्रत का दोष दूर किया जा सकता है.











