
Halla Bol: दिल्ली MCD चुनाव में 'पोस्टर' वाली सियासत, क्या असल मुद्दों पर चर्चा हो पाएगी?
AajTak
आज की बहस में बात होगी एक पोस्टर की. फिल्मी पोस्टर की नहीं बल्कि सियासी पोस्टर की जो बीजेपी की फैक्ट्री में छपा है लेकिन निशाना साधा गया है आम आदमी पार्टी पर. बीजेपी ने पोस्टर जारी करके दिल्ली एमसीडी चुनाव में माहौल को गरमा दिया है क्योंकि इस पोस्टर के नाम और जो किरदार हैं उनमें से दो किरदार गुजरात की चुनावी बयार बदलने के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं. बीजेपी का दावा है कि जिस फिल्म का पोस्टर जारी किया गया है उसके कुछ सिक्वल्स भी हैं जो एमसीडी चुनाव में बवंडर पैदा कर देंगे, केजरीवाल की जमीन ही खिसका देंगे. लेकिन केजरीवाल को खुद पर भरोसा है इसलिए वो दिल्ली की दहलीज से बाहर निकलकर गुजरात में भी अपनी पार्टी की ईमानदारी का ढिंढोरा पीट रहे हैं. लेकिन सबसे बड़ा सवाल कि क्या एमसीडी चुनाव में असल मुद्दों पर चर्चा हो पाएगी या फिर पोस्टर का जवाब पोस्टर से ही दिया जाएगा? अर्पिता आर्या के साथ देखिए हल्ला बोल में बहस.

आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









