
DNA ANALYSIS: अफगानिस्तान को अफसोस, UN-मलाला समेत सब खामोश? तालिबान ने किया देश को हाई जैक
Zee News
अफगानिस्तान (Afghanistan) पर आखिरकार तालिबान (Taliban) का कब्जा हो ही गया और इसी के साथ उसने शरई कानूनों की शुरुआत भी कर दी है. वहीं मानवाधिकारों की बात करने वाली बड़ी-बड़ी हस्तियों से लेकर दुनिया के अधिकतर देश अब भी पूरे हालात पर खामोशी ओढ़े हुए हैं.
नई दिल्ली: तालिबान (Taliban) ने अपने नए शासन का नाम Islamic Emirate of Afghanistan रखा है. आज जब अफगानिस्तान (Afghanistan) इतने बड़े संकट में है, तब संयुक्त राष्ट्र इस पर क्या कर रहा है? ये हम सबको जानना चाहिए. संयुक्त राष्ट्र पूरी दुनिया में लोकतांत्रिक मूल्यों और लोगों की आजादी के लिए काम करता है. इस समय दुनिया के 12 देशों में संयुक्त राष्ट्र की Peace Keeping Forces मौजूद हैं. इनमें एक Peace Keeping Force कश्मीर में भी काम कर रही है. हालांकि अफगानिस्तान में मानव अधिकारों को लेकर संयुक्त राष्ट्र का कोई मिशन नहीं है. इससे आप इस अंतर्राष्ट्रीय संस्था के चरित्र को समझ सकते हैं.
Rafale vs J-20 Mighty Dragon: राफेल और चीन के J-20 माइटी ड्रैगन के बीच तुलना में स्टील्थ बनाम सेंसर शक्ति की बहस तेज है. J-20 को रडार से बचने में बढ़त मिल सकती है, जबकि राफेल इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और सेंसर फ्यूजन में मजबूत है. आधुनिक हवाई युद्ध में नेटवर्क, मिसाइल रेंज और रणनीति निर्णायक भूमिका निभाते हैं.

India AI Impact Summit: यह समिट आम लोगों के लिए खुलेगा. इसमें दिखेगा कि AI असल जिंदगी में कैसे काम करता है. यह खेती, स्वास्थ्य, शिक्षा और डेली के समस्याओं को हल करने में मदद कर सकता है. Expo में 70000 वर्ग मीटर से बड़ा एरिया होगा. जिसमें 30 से अधिक देशों की 300+ कंपनियां अपने AI प्रोडक्ट्स और टेक्नोलॉजी दिखाएंगी. छात्रों के लिए YUVAi और AI for ALL जैसे प्रोग्राम होंगे.

Vibhav Anti-Tank Mines: विभव माइन को खास तौर पर मोबिलिटी किल यानी दुश्मन टैंक को पूरी तरह नष्ट करने के लिए नहीं बनाया गया है. बल्कि उसकी गति रोकने के लिए डिजाइन किया गया है. यह टैंक के ट्रैक, सस्पेंशन या ड्राइव सिस्टम को नुकसान पहुंचाकर उसे वहीं रोक देती है. इससे वह आगे बढ़ने में असमर्थ हो जाता है. इससे आसान निशाना बन जाता है.

DISC 12 Helicopter Landing System: भारत में हेलिकॉप्टर अक्सर पहाड़ी इलाकों, अग्रिम चौकियों और अस्थायी हेलिपैड पर उतरते हैं. जहां बुनियादी ढांचा बहुत कम होता है. ऐसे स्थानों पर पायलट अधिकतर दृश्य संकेतों के आधार पर लैंडिंग करते हैं. लेकिन कोहरा, धूल, बर्फबारी या खराब मौसम की स्थिति में यह तरीका जोखिम भरा हो सकता है.









