
Dattaji Rao Gaekwad: इस महाराजा से थी नजदीकी, किस्मत के सहारे मिली कप्तानी... ऐसी है गायकवाड़ की कहानी
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भारत के सबसे उम्रदराज टेस्ट क्रिकेटर और पूर्व कप्तान दत्ताजीराव गायकवाड़ का मंगलवार को 95 साल की उम्र में उनके गृहनगर बड़ौदा में निधन हो गया. किस्मत के सहारे भारतीय कप्तान बने दत्ताजीराव गायकवाड़ कवर ड्राइव के साथ क्रिकेट के अन्य शॉट खेलने के मामले में विजय हजारे को टक्कर देते थे.
Dattaji Rao Gaekwad : भारत के सबसे उम्रदराज टेस्ट क्रिकेटर और पूर्व कप्तान दत्ताजीराव गायकवाड़ का मंगलवार को 95 साल की उम्र में उनके गृहनगर बड़ौदा में निधन हो गया. आंकड़ों के मुताबिक वह 2016 में दीपक शोधन के निधन के बाद सबसे उम्रदराज जीवित भारतीय टेस्ट क्रिकेटर थे.
दत्ताजीराव महज 11 टेस्ट मैच खेल पाए
किस्मत के सहारे भारतीय कप्तान बने दत्ताजीराव गायकवाड़ कवर ड्राइव के साथ क्रिकेट के अन्य शॉट खेलने के मामले में विजय हजारे को टक्कर देते थे. हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वह अपनी प्रतिभा के साथ न्याय करने में विफल रहे. बड़ौदा के इस बल्लेबाज को अपनी प्रतिभा के दम पर 11 से अधिक टेस्ट खेलने चाहिए थे.
कवर ड्राइव से गेंदबाजों को परेशान करते थे
अपने शानदार कवर ड्राइव से 1950 के दशक की बॉम्बे (अब मुंबई) की मजबूत टीम को परेशान करने वाले दत्ताजीराव का अंतरराष्ट्रीय करियर घरेलू क्रिकेट जितना परवान नहीं चढ़ा, उन्हें 1952 से 1961 तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वैसी सफलता नहीं मिली.
उनके बेटे अंशुमन ने 1970 से 80 के दशक तक 40 टेस्ट खेले. अंशुमान का रक्षात्मक खेल अपने पिता से मजबूत था. देश की आजादी के बाद के पहले ढाई दशकों में हालांकि हर क्रिकेटर को हमेशा आंकड़ों के चश्मे से नहीं आंका जा सकता था.

2003 के क्रिकेट वर्ल्ड फाइनल में भारतीय टीम खिताब जीतने के लिए मैदान पर उतरी थी, लेकिन कुछ ही घंटों में ये सपना टूट गया था. रिकी पोंटिंग की तूफानी पारी, वीरेंद्र सहवाग की अकेली जंग और 'स्प्रिंग बैट' की रहस्यमयी अफवाहों ने इस मुकाबले को सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि क्रिकेट इतिहास की सबसे चर्चित और यादगार कहानी बना दिया.












