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Cyclone Asna: इस दुर्लभ तूफान ने साइंटिस्ट का भी बढ़ाया सिर दर्द! सालों बाद क्यों हो रही ऐसी घटना
Zee News
Cyclone Asna: आमतौर पर मॉनसून में अरब सागर का तापमान 26 डिग्री सेल्सियस तक रहता है. वहीं चक्रवाती तूफान तब बनते हैं जब तापमान 26.5 डिग्री से उपर जाता है. ऐसे में जुलाई से लेकर सितंबर तक यहां साइक्लोन बनने की संभावना बेहद कम होती है.
नई दिल्ली: Cyclone Asna: गुजरात राज्य के कच्छ तट पर बना चक्रवाती तूफान असना बिना कुछ ज्यादा प्रभाव डाले अरब सागर में ओमान की तरफ बढ़ गया है. मौसम विभाग के मुताबिक यह तूफान अगले 24 घंटों में अरब सागर के उत्तर-पूर्व में पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की तरफ बढ़ेगा और भारतीय तट से दूर हो जाएगा. असना तूफान साल 1976 के बाद से अरब सागर में अगस्त के महीने के दौरान आया पहला चक्रवात तूफान है. इस तूफान का 'असना' नाम पाकिस्तान ने रखा है. बता दें कि 31 अगस्त 2024 तक इस तूफान के गुजरात के तटों से टकराने की आशंका जताई गई थी, हालांकि अब यह अरब सागर में पाकिस्तान की ओर मुड़ गया है. Cyclonic Storm ASNA lay centered at 1730 hours IST of 30th August, 2024 near 170 km west of Naliya (Gujarat), 160 km south of Karachi (Pakistan) and 430km east-southeast of Pasni (Pakistan). It is likely to continue to move away from Indian coast during next 24 hours. Monsoon Update
Surprising to see the system over N Arabian sea is intensifying into a cyclonic storm. In text books we learnt that N Arabian sea becomes colder during the season due to ocean upwelling & no system can intensify

Indian Air Force refuelling aircraft: भारत के पास अभी सिर्फ 6 पुराने Il-78MKI विमान हैं जो 2003-2004 में उज्बेकिस्तान से लिए गए थे. पुर्जों की कमी की वजह से इनमें से आधे से ज्यादा विमान अक्सर मरम्मत के लिए खड़े रहते हैं. पिछले साल भारत ने अमेरिका की एक कंपनी से एक टैंकर विमान लीज पर लिया था, लेकिन उसके साथ अमेरिकी क्रू आता है, जो युद्ध के समय भारत के काम नहीं आ सकेगा. ऐसे में ये नए विमान नई ताकत बनेंगे.

Tejas-MK2 Rollout: राफेल डील के बीच इंडियन एयरफोर्स के लिए बड़ी खुशखबरी है. HAL-DRDO ने कमाल का काम करते हुए तेजस मार्क-2 को उड़ान के लिए तैयार कर दिया है. इसका इंटरनल रोलआउट पूरा हो चुका है. अब स्वदेशी मिडियम वेट फाइटर जेट ट्रायल फेज में एंट्री कर गया है. इसके बाद कुछ मंजूरियों के बाद फाइनल रोलआउट होगा, जो सार्वजनिक तौर पर किया जाएगा.

Project Kusha Air Defence System: प्रोजेक्ट कुशा पूरी तरह 'मेड इन इंडिया' होगा, जिससे युद्ध के समय हमें किसी और देश के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा. साथ ही, रूस या अमेरिका जैसे देशों को अरबों डॉलर नहीं देने पड़ेंगे. वहीं, इसमें ऐसी तकनीकें जोड़ी जा रही हैं जो आने वाले दशकों तक दुश्मन के किसी भी नए विमान को मार गिराने में सक्षम होंगी.

Astra MK-1 Missile Upgrade: DRDO इस अपग्रेड में मिसाइल के प्रोपल्शन सिस्टम, फ्लाइट प्रोफाइल और एनर्जी मैनेजमेंट को बेहतर बनाएगा. इसके साथ ही गाइडेंस सिस्टम में भी सुधार किया जाएगा. लंबी दूरी तक मिसाइल की रफ्तार और maneuverability बनी रहे. यह अपग्रेड मिसाइल के मूल डिजाइन में बड़े बदलाव के बिना किया जाएगा.

Fateh Ghadir Class Submarines: ईरान लंबे समय से अमेरिका की नौसैनिक ताकत का मुकाबला असममित रणनीति के जरिए करता रहा है. पनडुब्बियों की तैनाती इसी रणनीति का हिस्सा है. जिसके तहत ईरान सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े नौसैनिक बलों पर दबाव बना सकता है. ईरानी नौसेना के मुताबिक उनकी पनडुब्बियां अमेरिकी नौसैनिक गतिविधियों पर चेतावनी देने में सक्षम हैं.








