
Corona की रफ्तार हो रही कम! राजधानी दिल्ली के बाद महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के हालात में भी सुधार
Zee News
दिल्ली में COVID-19 से 289 और लोगों की मौत हुई है जबकि संक्रमण के 8,506 नए मामले सामने आए हैं. वहीं महाराष्ट्र में बीते 24 घंटे में 39,923 नए संक्रमित मिले जबकि गुरुवार को यह आंकड़ा 42,582 था. यानी राज्य में 24 घंटे के अंदर 2659 नए मामलों की कमी आई है.
नई दिल्ली: कोरोना वायरस की दूसरी लहर अभी खत्म नहीं हुई है इस बीच तीसरी लहर की आहट ने चिंता बढ़ा दी है लेकिन आंकड़े फिलहाल राहत की गवाही दे रहे हैं. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित संक्रमण की मार झेलने वाले राज्य महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में अब कोरोना की चाल धीमी पड़ती दिख रही है. दिल्ली दिल्ली में शुक्रवार को कोरोना वायरस संक्रमण के 8,506 नए मामले सामने आए जो एक महीने में सबसे कम आंकड़ा है और संक्रमण दर अब कम होकर 12.40 प्रतिशत रह गई है. इसके साथ ही महामारी से राष्ट्रीय राजधानी में 289 और लोगों की मौत हो गई.
Rafale vs J-20 Mighty Dragon: राफेल और चीन के J-20 माइटी ड्रैगन के बीच तुलना में स्टील्थ बनाम सेंसर शक्ति की बहस तेज है. J-20 को रडार से बचने में बढ़त मिल सकती है, जबकि राफेल इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और सेंसर फ्यूजन में मजबूत है. आधुनिक हवाई युद्ध में नेटवर्क, मिसाइल रेंज और रणनीति निर्णायक भूमिका निभाते हैं.

India AI Impact Summit: यह समिट आम लोगों के लिए खुलेगा. इसमें दिखेगा कि AI असल जिंदगी में कैसे काम करता है. यह खेती, स्वास्थ्य, शिक्षा और डेली के समस्याओं को हल करने में मदद कर सकता है. Expo में 70000 वर्ग मीटर से बड़ा एरिया होगा. जिसमें 30 से अधिक देशों की 300+ कंपनियां अपने AI प्रोडक्ट्स और टेक्नोलॉजी दिखाएंगी. छात्रों के लिए YUVAi और AI for ALL जैसे प्रोग्राम होंगे.

Vibhav Anti-Tank Mines: विभव माइन को खास तौर पर मोबिलिटी किल यानी दुश्मन टैंक को पूरी तरह नष्ट करने के लिए नहीं बनाया गया है. बल्कि उसकी गति रोकने के लिए डिजाइन किया गया है. यह टैंक के ट्रैक, सस्पेंशन या ड्राइव सिस्टम को नुकसान पहुंचाकर उसे वहीं रोक देती है. इससे वह आगे बढ़ने में असमर्थ हो जाता है. इससे आसान निशाना बन जाता है.

DISC 12 Helicopter Landing System: भारत में हेलिकॉप्टर अक्सर पहाड़ी इलाकों, अग्रिम चौकियों और अस्थायी हेलिपैड पर उतरते हैं. जहां बुनियादी ढांचा बहुत कम होता है. ऐसे स्थानों पर पायलट अधिकतर दृश्य संकेतों के आधार पर लैंडिंग करते हैं. लेकिन कोहरा, धूल, बर्फबारी या खराब मौसम की स्थिति में यह तरीका जोखिम भरा हो सकता है.









