
Border 2 है क्रिटिक्स प्रूफ! रिव्यूज नहीं, इमोशन के सहारे टिकी है सनी देओल की फिल्म
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‘बॉर्डर 2’ उन फिल्मों में है, जिनका फैसला रिव्यू नहीं बल्कि जनता करती है. सनी देओल का भौकाल, 30 साल पुराना नॉस्टैल्जिया और एंटी-पाकिस्तान इमोशन इस फिल्म को क्रिटिक्स-प्रूफ बनाते हैं. यही वजह है कि नेगेटिव रिव्यू भी ‘बॉर्डर 2’ की रफ्तार नहीं रोक पाएंगे.
सनी देओल की फिल्म ‘बॉर्डर 2’ बस कुछ ही घंटों में रिलीज होने वाली है. ट्रेलर और गानों को मिले पॉजिटिव रिस्पॉन्स के बाद उम्मीद की जा रही है कि फिल्म भी धमाल करेगी. सनी देओल की फैन फॉलोइंग हमेशा से तगड़ी थी और ‘गदर 2’ के बाद पहले से भी मजबूत हो गई है. अब सवाल रिव्यूज का है… क्या ‘बॉर्डर 2’ को क्रिटिक्स से वैसे चमचमाते रिव्यू मिलेंगे, जिनसे लोगों में जल्दी से जल्दी फिल्म देखने की एक्साइटमेंट उमड़ने लगे? लेकिन इस सवाल का जवाब असल में मायने ही नहीं रखता, क्योंकि ‘बॉर्डर 2’ एक क्रिटिक्स-प्रूफ फिल्म है.
बॉलीवुड की क्रिटिक्स-प्रूफ फिल्में एक बार शाहिद कपूर की फिल्म ‘कबीर सिंह’ (2019) को याद कीजिए. क्रिटिक्स ने इस फिल्म की आलोचना में जमकर शब्द खर्च किए थे. लेकिन ‘कबीर सिंह’ न सिर्फ शाहिद कपूर के करियर की सबसे बड़ी फिल्म बनी, बल्कि ये 2019 की दूसरी सबसे बड़ी बॉलीवुड फिल्म भी थी. ‘एनिमल’ के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ.
पिछले साल आई विक्की कौशल की फिल्म ‘छावा’ के रिव्यूज भी बहुत चमचमाते हुए नहीं थे. लेकिन ये 11 महीनों तक बॉलीवुड की सबसे बड़ी फिल्म बनी रही और ‘धुरंधर’ के आने पर ही दूसरे नंबर पर गई. ये इसलिए हुआ क्योंकि ये भी एक क्रिटिक्स-प्रूफ फिल्म थी.
ऐसी फिल्मों को क्रिटिक्स-प्रूफ इसलिए कहा जाता है कि फिल्मी लेंस से देखने पर ये भले कमजोर मालूम होती हों, मगर इन कहानियों में इमोशन, जनता का कनेक्ट और फिल्म के स्टार का भौकाल बाकी सभी चीजों पर भारी पड़ता है.
लोगों के पास फिल्म देखने की ऐसी वजह होती है, जिसे फिल्म की टेक्निकल कमियों, पेस, स्टोरीटेलिंग की डिटेल्स या उनके सोशल मैसेज से कोई फर्क नहीं पड़ता. फिल्म में बस सही स्टार और दमदार पैकेजिंग का कॉम्बो हो. फिल्म बस वो डिलिवर कर दे जिसकी उम्मीद उससे है, तो जनता रिव्यूज की परवाह किए बिना थिएटर्स तक पहुंच जाती है. और ‘बॉर्डर 2’ ऐसी ही क्रिटिक्स-प्रूफ फिल्म है.
क्यों क्रिटिक्स-प्रूफ फिल्म है ‘बॉर्डर 2’? हर फिल्म जनता से कुछ अलग वादा करती है और जनता की हर फिल्म से उम्मीद भी अलग होती है. ‘बॉर्डर 2’ सिनमैटिक इनोवेशन या तकनीक में कुछ क्रांतिकारी करने का वादा करने वाली फिल्म नहीं है. ये करीब 30 साल पहले आई ‘बॉर्डर’ का सीक्वल है, जिसे आज भी देशभक्ति का सॉलिड डोज देने वाली इंडिया की बेस्ट वॉर फिल्मों में गिना जाता है.

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