
BIGG BOSS OTT: TV से पहले यहां पर 6 हफ्ते पहले स्ट्रीम होगा बिग बॉस, जानिए डिटेल्स
Zee News
Bigg Boss 15: ओटीटी पर प्रीमियर किए जाने के 6 हफ्ते बाद 'बिग बॉस 15' को कलर्स चैनल पर टेलिकास्ट किया जाएगा.
नई दिल्ली: बिग बॉस को लेकर बड़ी खबर आई है. अब ये रियलिटी शो बिग बॉस पहली बार डिजिटल होने जा रहा है. खास बात ये है कि ये शो इस बार वक्त से पहले भी आ रहा है. दरअसल, इस शो के टेलीविजन प्रीमियर से पहले ही स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म वूट पर लॉन्च किया जाएगा. डिजिटली लॉन्च होने की वजह से दर्शक इस शो से भरपूर अंदाज में लुत्फअंदोज हो सकेंगे. डिजिटली लॉन्च होने की वजह से इस बार की टैग लाइन होगी 'बिग बॉस ओटीटी के मजे लूट, ऑन्ली ऑन वूट.' अहम बात ये कि अब 'बिग बॉस 15' अब 3 महीने के बजाय 6 महीनों तक चलेगा. 6 हफ्ते पहले OTT पर होगा लॉन्च ओटीटी पर प्रीमियर किए जाने के 6 हफ्ते बाद 'बिग बॉस 15' को कलर्स चैनल पर टेलिकास्ट किया जाएगा. खास बात यह है कि इस सीजन के पहले 6 हफ्तों के एपिसोड को फैन्स और दर्शक कहीं भी और कभी भी बैठकर देख सकते हैं.
Rafale vs J-20 Mighty Dragon: राफेल और चीन के J-20 माइटी ड्रैगन के बीच तुलना में स्टील्थ बनाम सेंसर शक्ति की बहस तेज है. J-20 को रडार से बचने में बढ़त मिल सकती है, जबकि राफेल इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और सेंसर फ्यूजन में मजबूत है. आधुनिक हवाई युद्ध में नेटवर्क, मिसाइल रेंज और रणनीति निर्णायक भूमिका निभाते हैं.

India AI Impact Summit: यह समिट आम लोगों के लिए खुलेगा. इसमें दिखेगा कि AI असल जिंदगी में कैसे काम करता है. यह खेती, स्वास्थ्य, शिक्षा और डेली के समस्याओं को हल करने में मदद कर सकता है. Expo में 70000 वर्ग मीटर से बड़ा एरिया होगा. जिसमें 30 से अधिक देशों की 300+ कंपनियां अपने AI प्रोडक्ट्स और टेक्नोलॉजी दिखाएंगी. छात्रों के लिए YUVAi और AI for ALL जैसे प्रोग्राम होंगे.

Vibhav Anti-Tank Mines: विभव माइन को खास तौर पर मोबिलिटी किल यानी दुश्मन टैंक को पूरी तरह नष्ट करने के लिए नहीं बनाया गया है. बल्कि उसकी गति रोकने के लिए डिजाइन किया गया है. यह टैंक के ट्रैक, सस्पेंशन या ड्राइव सिस्टम को नुकसान पहुंचाकर उसे वहीं रोक देती है. इससे वह आगे बढ़ने में असमर्थ हो जाता है. इससे आसान निशाना बन जाता है.

DISC 12 Helicopter Landing System: भारत में हेलिकॉप्टर अक्सर पहाड़ी इलाकों, अग्रिम चौकियों और अस्थायी हेलिपैड पर उतरते हैं. जहां बुनियादी ढांचा बहुत कम होता है. ऐसे स्थानों पर पायलट अधिकतर दृश्य संकेतों के आधार पर लैंडिंग करते हैं. लेकिन कोहरा, धूल, बर्फबारी या खराब मौसम की स्थिति में यह तरीका जोखिम भरा हो सकता है.









