
Bhaum Pradosh Vrat 2024: भौम प्रदोष व्रत आज, जानें पूजन विधि, शुभ मुहूर्त और कथा
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जिस व्यक्ति की कुंडली में मंगल दोष हो उसे भौम प्रदोष का व्रत जरूर रखना चाहिए. मान्यता है कि भौम प्रदोष व्रत के दिन भगवान हनुमान को घी की नौ बाती वाला दीपक जलाने से हर तरह के कर्ज से मुक्ति मिलती है.
Bhaum Pradosh Vrat 2024: सनातन धर्म में हम महीने की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखने की परंपरा है. यदि प्रदोष व्रत मंगलवार के दिन पड़े तो उसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है. आज भौम प्रदोष व्रत मनाया जा रहा है. भौम प्रदोष व्रत में शिव के साथ हनुमान जी की भी पूजा की जाती है. मान्यता है कि इस दिन प्रदोष व्रत कथा पढ़ने या सुनने वालों के सारे संकट दूर हो जाते हैं.
भौम प्रदोष व्रत का महत्व जिस व्यक्ति की कुंडली में मंगल दोष हो उसे भौम प्रदोष का व्रत जरूर रखना चाहिए. मान्यता है कि भौम प्रदोष व्रत के दिन भगवान हनुमान को घी की नौ बाती वाला दीपक जलाने से हर तरह के कर्ज से मुक्ति मिलती है. ये व्रत रखने वालों की सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इस दिन व्रत और पूजा-पाठ करने से सारे कष्ट मिट जाते हैं और शिव-हनुमान की विशेष कृपा होती है.
भौम प्रदोष व्रत की तिथि और मुहूर्त हिंदू पंचांग के अनुसार, शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरूआत 15 अक्टूबर 2024 सुबह 3 बजकर 42 मिनट पर होगी और समापन अगले दिन यानी 16 अक्टूबर को 12 बजकर 19 मिनट पर होगा. उदया तिथि के चलते भौम प्रदोष व्रत 15 अक्टूबर को रखा जाएगा. इस दिन प्रदोष काल शाम 5:45 बजे से 8:00 बजे तक रहेगा. इस दौरान भगवान शिव की पूजा अर्चना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है.
भौम प्रदोष पर कैसे करें पूजा? प्रातः काल उठकर पूजा का संकल्प लें. इसके बाद ईशान कोण में शिव की स्थापना करें. शिव को पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित करें. कुश के आसन पर बैठकर शिवजी के मंत्रों का जाप करें. इसके बाद अपनी समस्याओं के अंत होने की प्रार्थना करें. निर्धनों को भोजन कराएं. अगर ये पूजा प्रदोष काल में कर लें तो और भी उत्तम होगा.
प्रदोष व्रत कथा स्कंद पुराण में वर्णित एक कथा के अनुसार प्राचीन काल में एक विधवा ब्राह्मणी अपने पुत्र को लेकर भिक्षा लेने जाती थी और संध्या को लौटती थी. एक दिन जब वह भिक्षा लेकर लौट रही थी तो उसे नदी किनारे एक सुन्दर बालक दिखाई दिया जो विदर्भ देश का राजकुमार धर्मगुप्त था. शत्रुओं ने उसके पिता को मारकर उसका राज्य हड़प लिया था. उसकी माता की मृत्यु भी अकाल हुई थी. ब्राह्मणी ने उस बालक को अपना लिया और उसका पालन-पोषण किया.
कुछ समय पश्चात ब्राह्मणी दोनों बालकों के साथ देवयोग से देव मंदिर गई. वहां उनकी भेंट ऋषि शाण्डिल्य से हुई. ऋषि शाण्डिल्य ने ब्राह्मणी को बताया कि जो बालक उन्हें मिला है वह विदर्भ देश के राजा का पुत्र है जो युद्ध में मारे गए थे और उनकी माता को ग्राह ने अपना भोजन बना लिया था. ऋषि शाण्डिल्य ने ब्राह्मणी को प्रदोष व्रत करने की सलाह दी. ऋषि आज्ञा से दोनों बालकों ने भी प्रदोष व्रत करना शुरू किया.

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