
Beating Retreat का इतिहास: भारत में कब हुई थी इस परंपरा की शुरुआत?
Zee News
Beating Retreat ceremony 2022: गणतंत्र भारत का वो धुन जिस पर पूरा हिंदुस्तान झूमता नजर आया. हर हिंदुस्तान एक पल के लिए भी उन दृश्यों से दूर नहीं होना चाहता जब गणतंत्र दिवस के बाद Beating Retreat का आयोजन होता है. क्या आप जानते हैं कि बीटिंग रिट्रीट की शुरुआत भारत में कब हुई थी?
नई दिल्ली: बीटिंग रिट्रीट की शुरुआत भारत में 1950 के दशक में हुई थी. भारतीय सेना के मेजर रॉबर्ट ने सेनाओं के बैंड्स के डिस्प्लेस के साथ इस सेरेमनी को पूरा किया था. बीटिंग रिट्रीट की परंपरा तब से चली आ रही है जब सूर्यास्त खत्म होने के बाद जंग बंद हो जाती थी.
वर्ष 1950 में लंदन में हुई Beating Retreat की ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरें लोगों को आज भी पसंद आती हैं, लेकिन Beating Retreat की परंपरा उस वक्त से चली आ रही है जब दुनिया में कैमरों का आविष्कार भी नहीं हुआ था.

Rafale vs J-20 Mighty Dragon: राफेल और चीन के J-20 माइटी ड्रैगन के बीच तुलना में स्टील्थ बनाम सेंसर शक्ति की बहस तेज है. J-20 को रडार से बचने में बढ़त मिल सकती है, जबकि राफेल इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और सेंसर फ्यूजन में मजबूत है. आधुनिक हवाई युद्ध में नेटवर्क, मिसाइल रेंज और रणनीति निर्णायक भूमिका निभाते हैं.

India AI Impact Summit: यह समिट आम लोगों के लिए खुलेगा. इसमें दिखेगा कि AI असल जिंदगी में कैसे काम करता है. यह खेती, स्वास्थ्य, शिक्षा और डेली के समस्याओं को हल करने में मदद कर सकता है. Expo में 70000 वर्ग मीटर से बड़ा एरिया होगा. जिसमें 30 से अधिक देशों की 300+ कंपनियां अपने AI प्रोडक्ट्स और टेक्नोलॉजी दिखाएंगी. छात्रों के लिए YUVAi और AI for ALL जैसे प्रोग्राम होंगे.

Vibhav Anti-Tank Mines: विभव माइन को खास तौर पर मोबिलिटी किल यानी दुश्मन टैंक को पूरी तरह नष्ट करने के लिए नहीं बनाया गया है. बल्कि उसकी गति रोकने के लिए डिजाइन किया गया है. यह टैंक के ट्रैक, सस्पेंशन या ड्राइव सिस्टम को नुकसान पहुंचाकर उसे वहीं रोक देती है. इससे वह आगे बढ़ने में असमर्थ हो जाता है. इससे आसान निशाना बन जाता है.










