
Anil Agarwal Post: 'भारत की ये तरक्की नहीं चाहती दुनिया... अटकाए जाते हैं रोड़े', अरबपति ने कही बड़ी बात
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Anil Agarwal ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए भारत में घरेलू उत्पादन को बढ़ाने और रोजगार के अवसरों में इजाफा करने पर जोर दिया. खासतौर पर Oil & Gas सेक्टर के लिए इसे सबसे जरूरी काम बताया है.
सोशल मीडिया पर खासे एक्टिव रहने वाले वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल (Vedanta Chairman Anil Agarwal) पर बीते दिनों दुखों का पहाड़ टूटा था, जब उनके इकलौते बेटे अग्निवेश अग्रवाल का अमेरिका में निधन (Agnivesh Agarwal Dies) हो गया था, इस दुख से उबरना आसान नहीं है. हालांकि, अरबपति कारोबारी अनिल अग्रवाल अब फिर से Soial Media पर सक्रिय नजर आ रहे हैं और उन्होंने ट्विटर (अब X) पर एक लेटेस्ट पोस्ट में बड़ी बात कही है. उन्होंने कहा कि, 'दुनिया भारत को उत्पादक के रूप में देखना ही नहीं चाहती है.'
'भारत को बाजार के रूप में देखती है दुनिया'अनिल अग्रवाल ने कहा कि दुनिया भारत से उत्पादन की अपेक्षा नहीं रखती, बल्कि, इसे सिर्फ एक बाजार के रूप में देखना चाहती है. उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि भारत को इस सोच का विरोध करना होगा और अधिक आत्मनिर्भर बनना होगा. देश को घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ाना होगा और रोजगार सृजन में इजाफा करना होगा. उन्होंने उदाहरण दिया कि, 'आखिर भारत ऐसा देश है, जो कभी भोजन के लिए आयात पर निर्भर था और अब आत्मनिर्भर है. यह इसलिए संभव हुआ, क्योंकि सरकार ने ऐसा बनाने के लिए एक आंदोलन चलाया.'
एनर्जी सेक्टर पर फोकस जरूरी अरबपति कारोबारी ने भारत के एनर्जी सेक्टर पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि अस्थिर भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए इसमें आत्मनिर्भरता जरूरी हो गई है. भारत असुरक्षित है, क्योंकि हम अपनी जरूरत का 90% तेल और गैस आयात करते हैं. हम तीन तरफ से समुद्र से घिरे हैं, जिन्हें किसी भी ग्लोबल टेंशन में अवरुद्ध किया जा सकता है. ऐसे में घरेलू प्रोडक्शन बढ़ाना ही एकमात्र विकल्प है. Anil Agarwal ने आगे कहा कि Oil & Gas के लिए इस बड़े बाजार में अगले 20 सालों में डिमांड और बढ़ने वाली है.
अग्रवाल ने बताया- क्या करना होगा? एनर्जी सेक्टर में निर्भरता कम करने के लिए अनिल अग्रवाल ने कहा कि भारत के पास अपार संसाधन, उद्यमी और प्रतिभाएं मौजूद हैं. हमें सिर्फ एक्सप्लोरेशन की जरूरत है, जो इस बिजनेस का मूल है. इसे समझाते हुए उन्होंने लिखा, '20 साल पहले हाइड्रोकार्बन आयात पर अमेरिका पूरी तरह निर्भर था, लेकिन उसने उद्यमियों के लिए एक्सप्लोरेशन ओपन किया और इसे लाभदायक बनाकर अपना एनर्जी आउटलुक ही बदल डाला. घरों और खेतों के पीछे भी ये किया गया और इससे सभी को लाभ हुआ.
In today’s turbulent geopolitics, it is critically important for every large nation to secure energy independence. India is vulnerable because we import 90% of our oil and gas. We are surrounded by sea on three sides which can be blockaded in hostile times. There is no option but…
'20 नहीं... 2000 लाइसेंस चाहिए'वेदांता चेयरमैन ने कहा कि इस सेक्टर में आज भारत में मुश्किल से 20 एक्टिव लाइसेंस हैं, जबकि ये 2,000 होने चाहिए. दुनिया तेजी से अपने ऊर्जा और खनिज संसाधनों को सुरक्षित कर रही है, भारत को भी जमीन के नीचे मौजूद संसाधनों का पूरा उपयोग करना चाहिए. भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत में उत्पादन को 10 गुना बढ़ाना होगा. उन्होंने कहा कि समय आ गया है हम कड़े नियमों से हटकर इस सेक्टर में प्रोडक्शन को आसान बनाने पर जोर दें.

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