
61% गिरा दिग्गज कंपनी का मुनाफा... बिखरा शेयर, एक्सपर्ट्स बोले- खरीदें!
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एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स का मुनाफा 61 फीसदी टूट चुका है, जिसके बाद से इसके शेयर में आज 8 फीसदी तक की गिरावट आई और यह 1400 रुपये के स्तर से नीेचे चला गया.
दिग्गज कंपनी के शेयर में गुरुवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली, क्योंकि कंपनी का मुनाफा साल दर साल 61 फीसदी गिर गया. पिछले साल इस कंपनी को 320 करोड़ का नेट प्रॉफिट हुआ था, लेकिन दिसंबर तिमाही के दौरान इसका प्रॉफिट 61 फीसदी गिरकर 89 करोड़ रुपये रह गया.
कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू 6 फीसदी गिरकर 4,114 करोड़ रुपये रह गया. तिमाही आधार पर भी रेवेन्यू में भारी गिरावट आई है. दूसरी तिमाही में रेवेन्यू 6,174 करोड़ रुपये था. हम बात कर रहे हैं LG Electronics India के बारे में, जिसके शेयर गुरुवार को इंट्राडे के दौरान 8 प्रतिशत टूटकर 1,394 रुपये पर आ गए. हालांकि थोड़े देर बाद कंपनी के शेयरों में रिकवरी आई और यह करीब 3 प्रतिशत टूटकर 1,475.50 रुपये पर आ गया.
इलेक्टॉनिक्स कॉस्ट में ज्यादा इजाफा एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स की कुल इनकम 4,190 करोड़ रुपये हो गया है, जो एक साल पहले 4,474 करोड़ रुपये था. प्रॉफिट बिफोर टैक्स 151 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 320 करोड़ रुपये था. कुल खर्च 4,038 रुपये था, जो पिछले साल की इस अवधि में 4,153 रुपये था. मैटेरियल लागत में सबसे बड़ी उछाल आई है और यह 2,988 रुपये पर आ गया है, जो पिछले साल 2,929 करोड़ रुपये था.
ब्रोकरेज ने इस शेयर पर क्या कहा? ICICI सिक्योरिटीज ने LG इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया पर 1,746 रुपये के कम टारगेट प्राइस के साथ बाय कॉल दिया है. यह देखते हुए कि Q3FY26 का परफॉर्मेंस त्योहारों के बाद के मौसम और कम ट्रेड और कंज्यूमर ऑफटेक के कारण उम्मीद से कमजोर रहा.
कंपनी ने अपनी प्रीमियम ब्रांड पोजिशनिंग को बचाने के लिए एग्रेसिव डिस्काउंटिंग से परहेज किया, जिससे मार्जिन पर असर पड़ा, जबकि कमोडिटी की ऊंची लागत और करेंसी डेप्रिसिएशन ने और दबाव डाला है. शॉर्ट-टर्म चुनौतियों के बावजूद, ब्रोकरेज पॉजिटिव बने हुए हैं.
मॉर्गन स्टेनली ने LG इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया पर 1,623 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ ओवरवेट रेटिंग दी है. ब्रोकरेज ने कहा कि तीसरी तिमाही के नतीजों पर कमजोर मार्जिन का असर पड़ा, त्योहारों के बाद कमजोर डिमांड के कारण रेवेन्यू में साल दर साल 6% की गिरावट आई. EBITDA में साल दर साल 39 फीसदी की कमी आई है, मुख्य कारण ऑपरेटिंग डीलेवरेज, कमोडिटी महंगाई में बढ़ोतरी और रुपये में गिरावट थी.

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