
44 साल पहले मर्डर से जुर्म का आगाज... अब तक 100 केस, जानें अतीक अहमद की क्राइम कुंडली
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अतीक अहमद का नाम जून 1995 में लखनऊ में हुए गेस्ट हाउस कांड के मुख्य आरोपियों में से एक था, जिन्होंने मायावती पर हमला किया था. मायावती ने गेस्ट हाउस कांड के कई आरोपियों को माफ कर दिया था, लेकिन अतीक अहमद को नहीं बख्शा.
यूपी का बाहुबली माफिया डॉन अतीक अहमद अब गुजरात की साबरमती जेल में बंद है. उस पर इल्जाम है कि उसने जेल में रहकर ही उमेश पाल हत्याकांड की पूरी साजिश रची थी. उसी के इशारे पर उमेश पाल को दिन दहा़ड़े गोलियों से भून दिया गया. हमले में उमेश पाल और उसके दोनों गनर मारे गए. अतीक पर इस तरह के संगीन जुर्म का ये इल्जाम पहला नहीं है, इससे पहले भी कई मामलों में उसके नाम का जिक्र आता रहा है. आइए जान लेते हैं पूर्व बाहुबली सांसद अतीक अहमद पूरी क्राइम कुंडली.
17 की उम्र में लगा था हत्या का आरोप अतीक अहमद की कहानी का आगाज साल 1979 से होता है. उस वक्त इलाहाबाद के चाकिया मोहल्ले में फिरोज अहमद का परिवार रहता था, जो तांगा चलाकर परिवार का गुजर-बसर करते थे. फिरोज का बेटा अतीक हाईस्कूल में फेल हो गया था. इसके बाद पढ़ाई लिखाई से उसका मन हट गया. उसे अमीर बनने का चस्का लग गया. इसलिए वो गलत काम धंधे में पड़ गया और रंगदारी वसूलने लगा. महज 17 साल की उम्र में उसके सिर हत्या का आरोप लग चुका था. उस समय पुराने शहर में चांद बाबा का दौर था. पुलिस और नेता दोनों चांद बाबा के खौफ को खत्म करना चाहते थे. लिहाजा, अतीक अहमद को पुलिस और नेताओं का साथ मिला. लेकिन आगे चलकर अतीक अहमद, चांद बाबा से ज्यादा खतरनाक साबित हुआ.
गेस्ट हाउस कांड में अतीक अहमद का नाम अतीक अहमद का नाम जून 1995 में लखनऊ में हुए गेस्ट हाउस कांड के मुख्य आरोपियों में से एक था, जिन्होंने मायावती पर हमला किया था. मायावती ने गेस्ट हाउस कांड के कई आरोपियों को माफ कर दिया था, लेकिन अतीक अहमद को नहीं बख्शा. मायावती के सत्ता में आने के बाद अतीक अहमद की उल्टी गिनती शुरू हुई तो जब-जब बसपा सरकार में आई, अतीक हमेशा उनके निशाने पर रहा. मायावती शासन काल में अतीक अहमद पर कानूनी शिकंजा कसने के साथ-साथ उसकी संपत्तियों पर बुलडोजर चलाने से लेकर कई बड़ी कार्रवाई हुई थी. यूपी में मायावती सरकार के दौरान अतीक अहमद जेल की सलाखों के पीछे ही रहा. बसपा के दौर में अतीक का दफ्तर गिरवाने के साथ-साथ उसकी संपत्तियां जब्त करवा कर उसे जेल भेजा गया था और प्रयागराज में उसकी राजनीतिक पकड़ को कमजोर ही नहीं बल्कि पूरी तरह से खत्म कर दिया गया था.
साल 2004 - सांसद बन गया था अतीक दरअसल, इस हमले और हत्याकांड को समझने के लिए हमें करीब 19 साल पीछे जाना होगा. देश में आम चुनाव हो चुका था. यूपी की फूलपुर लोकसभा सीट से बाहुबली नेता अतीक अहमद ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीत हासिल की थी. इससे पहले अतीक अहमद इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा सीट से विधायक थे. लेकिन उनके सांसद बन जाने के बाद वो सीट खाली हो गई थी. कुछ दिनों बाद उपचुनाव का ऐलान हुआ. इस सीट पर हुए सपा ने सांसद अतीक अहमद के छोटे भाई अशरफ को अपना उम्मीदवार बनाया. लेकिन बहुजन समाज पार्टी ने अशरफ के सामने राजू पाल को अपना प्रत्याशी बनाकर चुनाव मैदान में उतार दिया. जब उपचुनाव हुआ तो चौंकाने वाले नतीजे सामने आए बसपा प्रत्याशी राजू पाल ने अतीक अहमद के भाई अशरफ को हरा दिया.
25 जनवरी 2005 - राजू पाल हत्याकांड उपचुनाव में अशरफ की हार से अतीक अहमद के खेमे में खलबली थी. लेकिन धीरे-धीरे मामला शांत हो चुका था. मगर राजू पाल की जीत की खुशी ज्यादा दिन कायम ना रह सकी. पहली बार विधायक बने राजू पाल की कुछ महीने बाद ही 25 जनवरी 2005 को दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई. इस हत्याकांड में देवी पाल और संदीप यादव नाम के दो लोगों की भी मौत हुई थी. जबकि दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे. इस सनसनीखेज हत्याकांड ने यूपी की सियासत में भूचाल ला दिया था. इस सनसनीखेज हत्याकांड में सीधे तौर पर तत्कालीन सांसद अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ का नाम सामने आया था.
राजूपाल की पत्नी पूजा पाल ने दर्ज कराई थी FIR दिन दहाड़े विधायक राजू पाल की हत्या से पूरा इलाका सन्न था. बसपा ने सपा सांसद अतीक अहमद के खिलाफ धावा बोल रखा था. उसी दौरान दिवंगत विधायक राजू पाल की पत्नी पूजा पाल ने थाना धूमनगंज में हत्या का मामला दर्ज कराया था. उस रिपोर्ट में सासंद अतीक अहमद, उनके भाई अशरफ, खालिद अजीम को नामजद किया गया था. मामला दर्ज हो जाने के बाद पुलिस ने मामले की छानबीन शुरु कर दी थी.

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