
40 करोड़ गरीब, 60 फीसदी से भी कम हिंदू... क्या ऐसा होगा अखंड भारत!
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत का कहना है कि 15 साल में अखंड भारत हो जाएगा. पिछले साल भी भागवत ने कहा था कि जब बंटवारा संभव है तो फिर अखंड भारत भी संभव है.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने एक बार फिर 'अखंड भारत' का राग छेड़ा है. इस बार उन्होंने दावा करते हुए कहा कि 20-25 साल में तो भारत अखंड भारत बन जाएगा, लेकिन हम कोशिश करेंगे तो 15 साल में भी ऐसा हो सकता है. भागवत ने ये बातें हरिद्वार में कहीं. उन्होंने ये भी कहा कि इसे कोई रोकने वाला नहीं है. जो इसके रास्ते में आएंगे, वो मिट जाएंगे.
ये पहली बार नहीं है, जब भागवत ने अखंड भारत की बात कही हो. पिछले साल फरवरी में भी एक कार्यक्रम में भागवत ने कहा था कि दुनिया के कल्याण के लिए गौरवशाली अखंड भारत की जरूरत है, छोटे किए गए भारत को फिर से एकजुट करने की जरूरत है. भागवत ने उस कार्यक्रम में कहा था कि जब बंटवारा संभव है तो फिर अखंड भारत भी संभव है.
भागवत ने अखंड भारत पर सियासत भी जारी है. हैदराबाद से सांसद और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, 'अखंड भारत की बातें मत करो. चीन भारत के इलाके पर कब्जा करके बैठा है, जहां भारतीय सेना पेट्रोलिंग भी नहीं कर पाती, उसकी बातें करो.'
शिवसेना सांसद संजय राउत ने भी चुटकी लेते हुए कहा कि मोहन भागवत को ये काम 15 साल में नहीं, बल्कि 15 दिन में कर देना चाहिए. पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर, श्रीलंका और कंधार को भारत में मिला लेना चाहिए.
बहरहाल, इस सियासी बहस से अगर बाहर निकलकर सोचें कि क्या वाकई 'अखंड भारत' हो सकता है? तो इसका जवाब अभी कोई नहीं दे सकता. आरएसएस और बीजेपी कहते जरूर हैं कि ऐसा होगा, लेकिन कैसे होगा? इसका जवाब उनके पास भी नहीं है.
अभी तो ये भी साफ नहीं है कि भागवत के अखंड भारत की परिभाषा क्या है. ऐसा भारत जिसमें पाकिस्तान और बांग्लादेश भी हों या ऐसा भारत जिसमें पाकिस्तान-बांग्लादेश के अलावा नेपाल, भूटान, तिब्बत, म्यांमार, अफगानिस्तान और श्रीलंका भी हों. या फिर ऐसा भारत जिसमें इन सबके साथ-साथ कंबोडिया, मलेशिया, वियतनाम और इंडोनेशिया भी हों.

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