
300 करोड़ उड़ाने का टारगेट, 18 महीने की प्लानिंग, 8 बार हुए फेल... सबसे बड़े साइबर फ्रॉड की Inside Story
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Lucknow News: लखनऊ सहकारी बैंक में 146 करोड़ रुपए ट्रांसफर मामले में पांच की गिरफ्तारी हुई है. इनमें वारदात को अंजाम देने वाले मास्टर माइंड भी शामिल हैं. बैंक के कर्मचारी भी मामले में लिप्त हैं. इन लोगों ने साइबर फ्रॉड के लिए एक करोड़ रुपए भी खर्च किए थे. मुंबई से हैकर बुलाए थे. मगर, आखिर में सभी पकड़े गए हैं.
लखनऊ के बहुचर्चित यूपी सहकारी बैंक (UP Co-operative Bank Fraud Case) में 146 करोड़ रुपए सायबर फ्रॉड के जरिये ट्रांसफर करने मामले में पांच आरोपी गिरफ्तार हुए हैं. लखनऊ साइबर क्राइम पुलिस (Lucknow Cyber Crime Police) ने सभी को लखनऊ से गिरफ्तार किया. आरोपियों के पास से कई दस्तावेज के अलावा जरुरी चीजें मिली हैं. इस वारदात की कहानी पूरी फिल्मी है, जिसे पढ़कर आप भी हैरान हो जाएंगे.
बदमाशों ने वारदात को अंजाम देने के लिए 18 महीने की प्लानिंग की. इसके लिए एक करोड़ रुपए खर्च किए और आठ बार असफल हुए. इसके बाद 146 करोड़ की धोखाधड़ी की, लेकिन मकसद 300 करोड़ रुपए को पार करने का था. इस वारदात की पूरी कहानी पढ़िए आरोपियों की जुबानी, लेकिन उससे पहले जानिए मामले से जुड़ी कुछ खास बातें...
सरकारी नौकरी वाले हैं वारदात के मास्टर माइंड
साइबर क्राइम पुलिस ने जिन पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनमें वारदात का मास्टर माइंड रामराज है. वह लोक भवन लखनऊ में अनुभाग अधिकारी है. दूसरा मास्टर माइंड ध्रुव कुमार श्रीवास्तव है. तीसरा आरोपी कर्मवीर सिंह यूपी को-आपरेटिव बैंक के महमूदाबाद कार्यालय में भुगतान विभाग में तैनात था. चौथा आरोपी आकाश कुमार और पांचवा आरोपी भूपेंद्र सिंह है.
अब पढ़िए कैसे रचा गया साजिश का तानाबाना
गिरफ्तार ध्रुव कुमार श्रीवास्तव ने पूछताछ में पुलिस को बताया, ''मैं अपने मित्र ज्ञानदेव पाल के साथ मई 2021 में लखनऊ आया था. यहां मेरी मुलाकात आकाश कुमार से हुई. आकाश के जरिए हम एक ठेकेदार से मिले. उसने बताया कि मेरे पास एक हैकर है. यदि हम लोग यूपी सहकारी बैंक के किसी अधिकारी को सेट कर लें, तो बैंक के सिस्टम को रिमोट एक्सेस करके लगभग तीन सौ करोड़ रुपए अपने फर्जी खातों में ट्रांसफर कर सकते हैं."

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