
1971: जब इंदिरा गांधी ने एक संयुक्त विपक्ष को हराया और सामंती ताक़तों को ख़त्म किया…
The Wire
'ग़रीबी हटाओ' के नारे के साथ उस साल इंदिरा की जीत ने कांग्रेस को नई ऊर्जा से भर दिया था. 1971 एक ऐतिहासिक बिंदु था क्योंकि इंदिरा गांधी ने लक्ष्य और दिशा का एक बोध जगाकर सरकार की संस्था में नागरिकों के विश्वास की बहाली का काम किया.
भारतीय इतिहास के कैलेंडर में 1971 के नाम कई बड़ी जीतें दर्ज हुईं- सियासत हो, क्रिकेट या फिर जंग. भारत के लिए इन सबका दूरगामी नतीजा निकलनेवाला था. भले ही भारत घरेलू मोर्चे पर कई समस्याओं से जूझ रहा था, लेकिन फिर भी देश एक नई उमंग से भरा हुआ था. ‘कांग्रेस सत्ता में वापसी करेगी, कम से कम केंद्र में, लेकिन काफी घटे हुए बहुमत के साथ… मुझे लगता है कि सरकार में एक ज्यादा मजबूत कैबिनेट होगी. हमारे कुछ मंत्री जो नारों और वामपंथी भाषा में बात कर रहे हैं, अभी तक यह बात नहीं समझ पाए हैं कि यह 1967 है, 1952 नहीं. आज दुनिया दूसरी भाषा में बात कर रही है…’ ‘..कांग्रेस एक ऐसी स्थिति में पहुंच गई है जहां इसे या तो क्रांतिकारी नीतियां अपनानी होंगी या विखंडित हो जाना होगा… 50 सालों के बाद हम मुड़कर उस समय को देख रहे हैं और उसका अक्स उभारने की कोशिश कर रहे हैं. लेखों की एक श्रृंखला के तहत नामचीन लेखक उन महत्वपूर्ण घटनाओं और प्रक्रियाओं को याद करेंगे जिन्होंने एक जवान, संघर्षरत मगर उम्मीदों से भरे भारत पर अपनी छाप छोड़ने का काम किया. और सिर्फ कांग्रेस ही अकेले संकट में नहीं है. देश एक ऐसे दौर से गुजर रहा है जिसमें व्यावहारिक तौर पर सभी राजनीतिक पार्टियां आंतरिक असंतोष और विखंडन से जूझ रही हैं. ये आंतरिक असंतोष और कुछ नहीं लोकतांत्रिक कामकाज को लेकर विरोधी रवैयों और एक विकासशील देश की चुनौतियों की अभिव्यक्तियां हैं. इतिहास महानता का तमगा सिर्फ एक किस्म के नेता लिए महफूज रखता है- वे जो राज-व्यवस्था को मौत के मुंह से खींचकर उसकी हिफाजत करते हैं और और उसे नया जीवन देते हैं. इतिहास उन नेताओं को मान्यता देता है जो राजनीतिक परिदृश्य का कायापलट करने के लिए रंगमंच पर कब्जा कर लेते हैं. चिंता इस बात को लेकर है कि यह रुझान लोकतांत्रिक मोर्चे के विखंडन और लोकतांत्रिक कार्यकलाप और सरकार की स्थिरता के लिए खतरा पेश करनेवाले छोटे-छोटे समूहों के निर्माण की ओर लेकर जाएगा. लेकिन, अगर राजनीतिक दलों के बीच ये आंतरिक संघर्ष और असंतोष राजनीतिक शक्तियों के ध्रुवीकरण का रास्ता तैयार करेंगे, तो यह एक स्वागतयोग्य रुझान होगा और मैं इसका स्वागत करूंगा. मैं हमारी विचारधारा में यकीन करनेवाली सभी प्रगतिशील शक्तियों को हमारे संगठन में शामिल होने होने के लिए आमंत्रित करता हूं…’ इन दोनों कामों को एक ही क्षण में अंजाम दिये जाने का काम विरले ही होता है. भारत में यह लम्हा 1971 में आया और इंदिरा गांधी इस मौके को लपकते हुए राजनीतिक सुदृढ़ीकरण और बदलाव की प्रक्रिया की कर्णधार बनीं.
महाराष्ट्र के एक स्वयंभू ‘धर्मगुरु’ अशोक खरात को पुलिस ने नासिक से गिरफ़्तार किया है. उन पर एक 35 वर्षीय महिला के साथ तीन साल तक बार-बार रेप करने और आपत्तिजनक वीडियो बनाने का आरोप है. हाल ही में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष द्वारा उनके पैर धोने का वीडियो वायरल हुआ, जिसके बाद उनका विरोध तेज़ हो गया था.

एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट का प्रतिनिधित्व करने वाले फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (एफआईए) ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय से उड़ानों में कम से कम 60% सीटों के चयन के लिए कोई शुल्क न लेने के फैसले को वापस लेने का आग्रह किया है. समूह का कहना है कि इस कदम से एयलाइंस को हवाई किराए बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ेगा.

आरजी कर अस्पताल में बलात्कार और हत्या की शिकार जूनियर डॉक्टर की मां ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने भाजपा के उम्मीदवार के रूप में पनिहाटी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने पर सहमति दे दी है. प्रदेश भाजपा की ओर से इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है. हालांकि भाजपा ने उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की है, जिसमें इस सीट पर कोई प्रत्याशी घोषित नहीं किया गया है.

केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि देशभर में 2017 से अब तक सीवर और सेप्टिक टैंक की ख़तरनाक सफाई के दौरान 622 सफाईकर्मियों की मौत हो चुकी है. 539 परिवारों को पूरा मुआवज़ा दिया गया, जबकि 25 परिवारों को आंशिक मुआवज़ा मिला. मौतों के मामले में उत्तर प्रदेश 86 के साथ सबसे ऊपर है, इसके बाद महाराष्ट्र (82), तमिलनाडु (77), हरियाणा (76), गुजरात (73) और दिल्ली (62) का स्थान है.

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कोटद्वार के ‘मोहम्मद’ दीपक की याचिका पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा कि एक 'संदिग्ध आरोपी' होने के नाते वह अपनी मनचाही राहत, जैसे सुरक्षा और पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ विभागीय जांच की मांग नहीं कर सकते. दीपक ने बीते महीने कोटद्वार में एक मुस्लिम बुज़ुर्ग के साथ दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा की जा रही बदसलूकी का विरोध किया था.

यह त्रासदी नवंबर 2014 में बिलासपुर ज़िले के नेमिचंद जैन अस्पताल (सकरी), गौरेला, पेंड्रा और मरवाही में आयोजित सरकारी सामूहिक नसबंदी शिविरों के दौरान हुई थी. ज़िला अदालत ने आरोपी सर्जन को ग़ैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया और दो साल की क़ैद, 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया. साथ ही पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया.

वी-डेम की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के अंत तक दुनिया में 92 तानाशाही वाले देश और 87 लोकतांत्रिक देश मौजूद थे. भारत अभी भी 'चुनावी तानाशाह' बना हुआ है, इस श्रेणी में वह 2017 में शामिल हुआ था. 179 देशों में सें भारत लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स में 105वें स्थान पर है. पिछले वर्ष यह 100वें स्थान पर था.

बीते 3 फरवरी को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान लोकसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद अनुशासनहीन व्यवहार के लिए सात कांग्रेस सांसदों और एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद को निलंबित कर दिया गया था. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें इन सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी.

वी-डेम की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के अंत तक दुनिया में 92 तानाशाही वाले देश और 87 लोकतांत्रिक देश मौजूद थे. भारत अभी भी 'चुनावी तानाशाह' बना हुआ है, इस श्रेणी में वह 2017 में शामिल हुआ था. 179 देशों में सें भारत लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स में 105वें स्थान पर है. पिछले वर्ष यह 100वें स्थान पर था.




