
15 साल में पहली बार होली पर थिएटर्स खाली! ईद के लिए टॉक्सिक-धुरंधर 2 में मारामारी क्यों?
AajTak
ईद पर 'धुरंधर 2' और 'टॉक्सिक' का क्लैश गर्मा रहा है. लोग अभी से टिकट बुक करने के लिए तैयार बैठे हैं. लेकिन होली पर कोई बड़ी फिल्म ना आने की वजह से थिएटर्स को स्क्रीन्स बंद करनी पड़ रही है, शोज घटाने पड़ रहे हैं. बहस छिड़ गई है कि मेकर्स ने होली को ऐसे ठंडा क्यों छोड़ दिया?
फिल्म लवर्स ने बड़े पर्दे पर ईद सेलिब्रेशन की तैयारियां शुरू कर दी हैं. रणवीर सिंह की 'धुरंधर 2' और यश की 'टॉक्सिक' के क्लैश के लिए माहौल गर्माने लगा है. इंडिया में फिल्में सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं हैं, त्योहारों के सेलिब्रेशन का हिस्सा भी होती हैं. बिना बड़ी फिल्म रिलीज हुए, कोई बड़ा त्योहार पूरा ही नहीं होता. इसलिए जहां साल की दो सबसे बड़ी फिल्मों का क्लैश ईद के लिए माहौल बनाने लगा है, वहीं इससे पहले आ रही होली पर कोई 'बड़ी फिल्म' न आना जनता को खटकने लगा है.
कुछ लोग इसके लिए ईद पर टकरा रही 'धुरंधर 2' और 'टॉक्सिक' को दोष दे रहे हैं. कुछ बॉलीवुड के रिलीज प्लान को कोस रहे हैं और कुछ इस बात से नाराज हैं कि फिल्म इंडस्ट्री होली को, ईद के मुकाबले कम भाव क्यों देती है. लेकिन क्या सच में ईद की प्लानिंग की वजह से इस बार कोई होली रिलीज नहीं है?
15 साल बाद बिना फिल्मी रंग की होली! सोशल मीडिया पर कई लोगों और कई मीडिया रिपोर्ट्स ने हाल ही में हाईलाइट किया कि 2011 के बाद पहली बार होली पर कोई बड़ी हिंदी फिल्म रिलीज नहीं होगी. आने वाले दिनों में थिएटर्स के लिए खर्च मैनेज करना मुश्किल होने वाला है. वेलेंटाइन डे पर आईं 'ओ रोमियो' और 'तू या मैं' थकने लगी हैं. 20 फरवरी को आई 'अस्सी' और 'दो दीवाने सहर में' से शोज भरने की उम्मीद ट्रेड को पहले ही नहीं थी. और फरवरी की आखिरी रिलीज 'द केरला स्टोरी 2' का कानूनी पंगे से छूटकर रिलीज हो पाना मुश्किल है.
बॉलीवुड हंगामा की रिपोर्ट बताती है, थिएटर्स का हाल ऐसा है कि की थिएटर्स ने दिन में शोज घटा दिए हैं. जबकि कई मल्टीप्लेक्स ईद तक अपनी कुछ स्क्रीन्स बंद करने जा रहे हैं. क्योंकि शोज चलाने पर, कमाई से ज्यादा खर्च हो रहा है. कोई होली रिलीज ना होने से इस बार थिएटर्स के रंग उड़ने वाले हैं. इससे पहले 2002, 2003 और 2011 में ही होली पर कोई नई फिल्म नहीं रिलीज हो पाई थी. जबकि पिछले 26 सालों में होली के मौके पर आईं कई फिल्में अच्छी हिट्स साबित हुई हैं. जैसे- 'तू झूठी मैं मक्कार' (2023), 'केसरी' (2019), 'बद्रीनाथ की दुल्हनिया' (2017) और 'कहानी' (2012) वगैरह.
बड़ी फिल्मों के लिए कितना बड़ा मौका है होली? तस्वीर का दूसरा पहलू भी है. किसी भी दूसरे मौके की तरह होली पर हिट ही नहीं, तगड़ी फ्लॉप फिल्में भी आई हैं. अजय देवगन की ऐतिहासिक फ्लॉप 'हिम्मतवाला' (2013) और अक्षय कुमार की सुपर फ्लॉप फिल्मों में से एक 'बच्चन पांडे' (2022) होली पर ही आई हैं. पिछले 15 साल में हर होली पर बड़ी फिल्म रिलीज होने का दावा भी गोलमोल है. क्या 2015 की होली रिलीज रही मल्लिका शेरावत, ओम पुरी, नसीरुद्दीन शाह और अनुपम खेर की फिल्म 'डर्टी पॉलिटिक्स' भी अब 'बड़ी फिल्मों' में गिनी जाएगी? क्योंकि जब ये फिल्म आई थी, तब तो इसे किसी ने बड़ी फिल्म नहीं माना था.
होली हिट 'कहानी' को 2012 में सरप्राइज हिट ही कहा गया था क्योंकि इसने उम्मीद से कई गुना बेहतर बिजनेस किया था. लेकिन रिलीज से पहले किसी ने इस फिल्म से 100 करोड़ की उम्मीद नहीं लगाई थी. आयुष्मान खुराना की 'बेवकूफियां' (2014), अनुष्का शर्मा की 'परी' (2018), परिणीति चोपड़ा की 'साइना' (2021), रणदीप हुड्डा की 'स्वातंत्र्य वीर सावरकर' (2024) या फिर 'मडगांव एक्सप्रेस' (2024) के भरोसे होली को 'बड़ी फिल्मों' की रिलीज से नहीं जोड़ा जा सकता. क्योंकि असल में सच यही है कि इंडस्ट्री होली पर साल की सबसे बड़ी इवेंट फिल्में रिलीज करने से बचती है.

ऑस्कर्स के इतिहास में सबसे ज्यादा नॉमिनेशंस के रिकॉर्ड के साथ पहुंची 'सिनर्स' का जलवा 98वें ऑस्कर अवॉर्ड्स में नजर आया. लेकिन इससे ज्यादा बड़ी कामयाबी 'वन बैटल आफ्टर एनदर' के हाथ लगी जो इस अवॉर्ड सीजन सरप्राइज बनकर उभरी. 'सिनर्स' के लिए सबसे बड़ी कामयाबी माइकल बी जॉर्डन को मिली जो फाइनली बेस्ट एक्टर बने.












