10वीं पास लड़के ने लिखी अनोखी इनक्रिप्टेड बुक, दुनिया ने माना लोहा, तीन करोड़ के निवेश के ऑफर
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यह कहानी पढ़ाई में औसत रहे एक ऐसे छात्र की है जिसने सिर्फ दसवीं तक पढ़ाई की है, लेकिन आज उनकी ख्याति दूर-दूर तक है. यह हुआ उनके द्वारा एक किताब लिखने पर. उनकी किताब इतनी खास है कि मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, कॉर्नेल यूनिवर्सिटी, अलेक्जेंड्रिया विश्वविद्यालय, जेएमआई और आईआईटी दिल्ली जैसे दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के पुस्तकालयों में जगह मिली है.
अक्सर जब कोई किताब लिखता है, तो उसे लेकर पब्लिशर के पास जाता है. कंटेंट स्कैनिंग और एडिटिंग के बाद वो छपकर आती है. फिर प्रचार-प्रसार के जरिये पाठकों तक पहुंचती है. अगर नामी लेखक हैं तो किताब को बेचना आसान होता है, लेकिन अगर नये लेखक हैं तो इसमें और भी मुश्किलें आती हैं. लेकिन प्रयागराज के इस 22 साल के युवा की पूरी कहानी ही अलग है. एकेडमिक क्वालीफिकेशन में सिर्फ दसवीं पास यासीन अम्मार, जिसने भाषाओं की परिधि से बाहर जाकर किताब लिखी जो रातोंरात इतनी हिट हो गई कि वो दुनिया की टॉप लाइब्रेरी में जगह पा चुकी है. यही नहीं किताब में निवेश के लिए अभी तक तीन करोड़ रुपये के ऑफर भी अम्मार को मिल चुके हैं.
aajtak.in से बातचीत में अम्मार ने बताया कि उन्होंने एन्क्रिप्टेड कोड में ये किताब लिखी है. मैंने लॉकडाउन के दौर में खेल-खेल में ये किताब लिखी थी. साल 2020 के अंत में इसकी सिर्फ 200 प्रतियां छपवाई थीं, ये बिना प्रकाशक की कैटेगरी में छपी थी. लेकिन इसे दुनिया के तमाम कोनों में रहने वाले लोग पसंद कर रहे हैं. अम्मार बताते हैं कि वो इलाहाबाद (प्रयागराज)के सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उनके पिता मो यासीन छोटा-मोटा बिजनेस करते हैं. वहीं, मां परवीन गवर्नमेंट टीचर हैं. उन्होंने दसवीं की पढ़ाई एअरफोर्स स्कूल प्रयागराज से की और दिल्ली आ गए.
पढ़ाई में थे एवरेज छात्र पर...
अम्मार कहते हैं कि मैं पढ़ाई में एवरेज छात्र था लेकिन टेक्नोलॉजी से बहुत लगाव था. उन्होंने दिल्ली आकर पता किया कि जामिया से दसवीं पास के लिए डिप्लोमा इंजीनियरिंग के लिए क्राइटेरिया होता है. यहां जामिया से मैंने डिप्लोमा इन कंप्यूटर इंजीनियरिंग में एडमिशन ले लिया था. फिर कोविड के टाइम में अपने हिसाब से सब कुछ न कुछ कर रहे थे. मैंने भी मार्स कोड लैंग्वेज सीखी. मेरा अपना इंट्रेस्ट हैकिंग पर था. हैकिंग का ही एक कॉन्सेप्ट था जिसे मैंने स्टोरी के फॉर्म में द साल्टेड टाइटल से लिखा. लेकिन ये किताब मार्स कोड में लिखी जो कि बहुत खास था.
क्यों इतना पॉपुलर हुई किताब
अम्मार कहते हैं कि क्योंकि यह किताब काफी अलग थी. इसकी लैंग्वेज ही अलग थी. दरअसल मार्स कोड एक इनक्रिप्शन तकनीक थी जो एक तरह से डिफेंस की लैंग्वेज है. इसका इस्तेमाल दुश्मन को चकमा देने के लिए होता रहा है. मसलन इस लैंग्वेज में लिखा दस्तावेज अगर उसके हाथ भी लगता है तो वो कम्यूनिकेशन तब तक नहीं समझ सकता जब तक उसे ये हिडेन लैंग्वेज पूरी तरह समझ न आती हो.

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