
क़ानून की भाषा में अदृश्य बच्चियां
The Wire
यदि हमारी क़ानूनी भाषा ही बालिकाओं को नाम से पुकारने में हिचक रही है, तो बराबरी का सपना अधूरा ही है. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर यह छोटा-सा क़दम उठाने की ज़रूरत है कि न्याय केवल संरचनाओं में नहीं, शब्दों में भी दिखाई दे.
हमारे समाज में महिलाओं को शुरुआत से ही कई स्तरों पर गैरबराबरी झेलनी पड़ती है. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर जब हम बराबरी की बात करते हैं, तो यह सवाल भी जरूरी है कि क्या हमारे कानूनों की भाषा सचमुच बालिकाओं को बराबरी से देखती है या शब्दों के बीच कहीं खो जाती है?
हाल ही में इंडिया जस्टिस रिपोर्ट भारत में नाबालिग बच्चों के कानूनी दायरे में आने पर एक अध्ययन किया. इसमें बच्चों के लिए मौजूद विधिक प्रावधानों और इनकी वास्तविक स्थिति को जांचा गया. इसमें पाया गया कि कानूनी परिभाषा और उसके पालन में अंतर है. विधिक संस्थानों में भी बालिकाओं के प्रति अलग व्यवहार दिखता है.
लोकतंत्र और न्याय को लेकर एक उक्ति अक्सर दोहराई जाती है कि कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति को न्याय न मिलने तक किसी व्यवस्था को न्यायपूर्ण नहीं कहा जा सकता. देश में न्याय की प्रतीक्षा करने वाले सबसे कमजोर वर्गों में नाबालिग बच्चे भी शामिल हैं और उनमें भी बालिकाएं कई स्तरों पर दोहरी उपेक्षा का सामना करती हैं.
वर्ष 2015 में ‘किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम’ लागू किया गया था. इस कानून को लागू हुए अब दस वर्ष हो चुके हैं. ऐसे में एक दशक का यह समय ठहरकर देखने का अवसर देता है कि क्या हम वास्तव में सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं? क्या यह दिशा बालिकाओं के लिए भी समान रूप से सुरक्षित और संवेदनशील है?
जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के दस वर्ष पूरे होने पर ‘इंडिया जस्टिस रिपोर्ट’ ने एक विस्तृत विश्लेषण किया. इसका उद्देश्य कानून के प्रावधानों के जमीनी क्रियान्वयन और वस्तुस्थिति का आकलन करना था. इस रिपोर्ट के लिए ‘सूचना के अधिकार’ के तहत देशभर के किशोर न्याय बोर्डों, बाल गृहों और संबंधित संस्थाओं से उनके बजट, मानव संसाधन और निगरानी से जुड़े सवाल पूछे गए.
अध्ययन के दौरान एक अहम अनुभव यह रहा कि बच्चों के हितों की रक्षा से जुड़ी सभी संस्थाएं सूचना साझा करने के मामले में देश की अन्य संस्थाओं की तरह ही उदासीन हैं. 28 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में 250 से अधिक आरटीआई आवेदन भेजे गए. इनमें से 11 प्रतिशत आवेदन सीधे खारिज कर दिए गए और 24 प्रतिशत का कोई जवाब नहीं मिला. यानी एक तिहाई से अधिक आवेदनों को शुरुआती चरण में ही नकार दिया गया.

लोकसभा में सपा सांसद धर्मेंद्र यादव के सवाल के जवाब में केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि मणिकर्णिका घाट एएसआई के तहत संरक्षित स्मारक नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि घाट पर चल रहा कार्य घाट की गरिमा को बहाल करने के उद्देश्य से किए जा रहे जीर्णोद्धार और संरक्षण परियोजना का हिस्सा है.

देश में एलपीजी गैस की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता के बीच गुरुवार को संसद में जारी बजट सत्र के दूसरे चरण के दौरान ज़ोरदार हंगामा देखने को मिला. कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने सरकार पर इस मुद्दे पर ग़लत जानकारी देने का आरोप लगाया और इस पर संसद के भीतर विस्तृत चर्चा की मांग की. हालांकि, सरकार का कहना है कि देश के पास पर्याप्त भंडार हैं.

ईरान संघर्ष के बीच कंटेनर जहाजों की कमी के कारण कच्चे माल की कीमतों में करीब 30% की बढ़ोतरी हुई है, जिसके चलते भारत में दवाओं के दाम तेज़ी से बढ़ने की आशंका है. उद्योग से जुड़े लोगों ने कहा कि जहाजों की कमी के कारण चीन से आने वाले एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (एपीआई) की आपूर्ति प्रभावित हुई है. चीन भारतीय दवा निर्माताओं के लिए कच्चे माल का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक ने ‘प्रेस नोट 3’ के जरिए भारत के साथ स्थल सीमा साझा करने वाले देशों, मुख्य रूप से चीन पर लगाए गए प्रतिबंधों को वापस लेने का फैसला किया है. यह नियम इन देशों से आने वाले स्वत: निवेश पर रोक लगाता था. विपक्षी दलों ने इस निर्णय को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है.

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते मार्च 2026 की शुरुआत से विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ), जो किसी एयरलाइन की परिचालन लागत का लगभग 40% हिस्सा होता है, की आपूर्ति में रुकावटों के कारण क़ीमतों में काफी वृद्धि हुई है, जिसके चलते एयर इंडिया समूह ने अपनी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर चरणबद्ध तरीके से फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने का निर्णय लिया है.

ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के बीच भारत के कई राज्यों में एलपीजी सिलेंडरों को लेकर चिंता बढ़ गई है. कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही हैं. हालांकि सरकार ने देश में गैस की कमी से इनकार किया है. अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा स्थिति घबराहट में बढ़ी बुकिंग और वितरण बाधाओं से बनी है.

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने विधानसभा में बताया कि जून 2024 से अब तक राज्य में 54 सांप्रदायिक दंगे और सात मॉब लिंचिंग की घटनाएं दर्ज की गई हैं. सबसे अधिक 24 सांप्रदायिक दंगे बालासोर ज़िले में दर्ज किए गए, जबकि 16 मामले खुर्दा ज़िले में सामने आए. हालांकि इन मामलों में 50 प्रतिशत से भी कम मामलों में आरोपपत्र दाखिल किया गया है.

दिल्ली के उत्तम नगर इलाके में होली पर मुस्लिम महिला पर गुब्बारा फेंकने को लेकर हुए विवाद में 26 वर्षीय तरुण की हत्या के बाद रविवार को एमसीडी ने मुख्य आरोपियों के घर के कुछ हिस्से को अतिक्रमण बताते हुए ढहा दिया. वहीं आरोपी परिवार का कहना है कि हत्या उन्होंने नहीं की है. तरुण का परिवार न्याय की मांग कर रहा है, वहीं आरोपी परिवार की एक सदस्य का कहना है कि पड़ोसियों की लड़ाई को धर्म की लड़ाई बना दिया गया है.





