
हैदराबाद के निजाम की 200 करोड़ से ज्यादा की प्रॉपर्टी महाराष्ट्र में सीज, प्रशासन ने बताई ये वजह
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हैदराबाद के निजाम की महाराष्ट्र के सतारा में 200 करोड़ से ज्चादा की प्रॉपर्टी को सीज करा दिया गया. प्रशासन की ओर से आदेश जारी किया गया था कि इस संपत्ति को सीज किया जाएगा. दरअसल एक दिसंबर को इस संपत्ति पर कब्जा करने के लिए 60-70 लोगों की भीड़ पहुंची थी, जिसकी वजह से इलाके में तनाव था और कानून-व्यवस्था की समस्या हो गई थी.
महाराष्ट्र के महाबलेश्वर में हैदराबाद के निजाम की 200 करोड़ रुपये से ज्यादा की प्रॉपर्टी को सीज कर दिया गया. हैदराबाद के निजाम द्वारा ये जगह पट्टे पर दी गई थी, जिस पर वुडलॉन बंगला भी बना हुआ था, उसे भी जब्त कर लिया गया.
सतारा के डीएम और तहसीलदार की टीम ने 15 एकड़ जमीन हैदराबाद के निजाम द्वारा पट्टे पर दिए गए मुख्य बंगला और परिसर के सभी भवनों को आज सील कर दिया. निजाम की इस संपत्ति की कीमत 200-250 करोड़ रुपये बताई जा रही है. दरअसल एक दिसंबर को इस संपत्ति पर कब्जा करने के लिए 60-70 लोगों की भीड़ पहुंची थी, जिसकी वजह से इलाके में तनाव था और कानून-व्यवस्था की समस्या हो गई थी.
जिसकी वजह से डीएम रुचेश जयवंशी ने महाबलेश्वर की तहसीसदार सुषमा चौधरी पाटिल को 2 दिसंबर को वुडलॉन संपत्ति पर कब्जा करने का आदेश दिया. इस बंगले में कई सालों से सीएम एकनाथ शिंदे गुट के पूर्व महापौर स्वप्नाली शिंदे और उनके पति पूर्व नगरसेवक कुमार शिंदे रह रहे थे. तहसीलदार पाटिल ने उन्हें सरकारी कार्रवाई की जानकारी दी और उन्हें अपना सामान निकालकर जाने को कहा. जिसके बाद शाम करीब पांच बजे तक सामान हटाने का काम शुरू हुआ.
इस बीच तहसीलदार के सामने मुख्य बंगले के सभी कमरों को सील कर दिया गया. निजाम के स्टाफ क्वार्टर को भी सील कर दिया गया. अंत में टीम द्वारा बंगले के दोनों गेट को सील कर दिया गया. किसी भी निजी व्यक्ति को बंगले में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है. हैदराबाद के नवाब मीरसाहब उस्मान अली खान बहादुर की ओर से साल 1952 में अंग्रेजों ने एक पारसी वकील को यह संपत्ति पट्टे पर दी थी. नवाब पर आयकर वसूली के लिए 59 लाख 47 हजार 797 रुपये बकाया था. कर वसू्ली अधिकारी कोल्हापुर के पत्रों में आय कर पर बकाया दर्ज किया गया था और जब तक यह वसूली नहीं की जाती है, तब तक इस आय की बिक्री, गिरवी रखना और किसी भी प्रकार के लेन-देन पर प्रतिबंध लगा दिया गया था.
आय पर सभी पट्टेदारों के नाम की वजह से यह आय सरकार के पास जमा थी. वर्ष 2005 में कलेक्टर द्वारा दिये गये आदेश को वापस ले लिया गया और स्थिति पहले जैसी बनी रही. जब आयकर को लेकर स्थानीय ठेकेदार और नवाब के बीच विवाद शुरू हुआ तो बार-बार यह प्रॉपर्टी हड़पने का प्रयास किया गया. बीते एक दिसंबर को हैदराबाद के नबाब का 9वां वारिस इस संपत्ति पर कब्जा करने आया. नबाब के साथ करीब 40 से 50 महिलाएं भी थीं. बाउंसरों की अधिक संख्या के कारण इस स्थान पर तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई थी. सतारा जिले के कलेक्टर द्वारा किए गए काम की वजह से काफी तारीफ हो रही है.
(रिपोर्ट- इम्तियाज मुजावर)

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