
हिमंत बिस्व सरमाः राहुल से नाराज होकर थामा था BJP का दामन, अब बनेंगे असम के CM
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असम की सियासत के कद्दावर हिमंत की गिनती उन चंद नेताओं में होती है, जिनकी दाद विरोधी भी देते हैं. कांग्रेस की गठबंधन सहयोगी रही यूडीएफ के बदरुद्दीन अजमल ने भी हिमंत के बारे में कहा था कि उस आदमी में कोई तो खास बात है. वो (हिमंत) दोस्तों का दोस्त है और दुश्मनों का दुश्मन है.
असम की सियासत का एक ऐसा चेहरा जो हमेशा चर्चा में रहता है. कभी अपने बेबाक बोल से तो कभी विवादों को हवा देने वाले बयानों से. लेकिन इस बार वजह कुछ और रही. बात हो रही है हिमंत बिस्व सरमा की. पहले अटकलों का बाजार गर्म रहा बाद में ऐलान हो गया कि हिमंत ही असम के अगले मुख्यमंत्री होंगे. हिमंत के असम की सत्ता के शीर्ष पर काबिज होने को महज औपचारिकता माना जा रहा है. हिमंत ने छात्र जीवन में ही राजनीति का ककहरा सीखा और सियासत में आते ही छा गए थे. हिमंत बिस्व सरमा साल 1991-92 में गुवाहाटी के कॉटन कॉलेज यूनियन सोसाइटी के जनरल सेक्रेटरी रहे थे. हिमंत 2001 के विधानसभा चुनाव में असम की जालुकबारी सीट से पहली बार चुनाव मैदान में उतरे और जीते. पहली बार विधानसभा पहुंचे हेमंत को तरुण गोगोई ने कैबिनेट मंत्री बना दिया.
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