
हिंसक मोबाइल गेम का बच्चों के दिमाग पर पड़ रहा बुरा असर, जानिए पैरेंट्स किस तरह से रहें अलर्ट
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चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉक्टर धीरेन गुप्ता ने बताया कि कोरोना के बाद से बच्चों का स्क्रीन टाइम बहुत ज्यादा बढ़ गया है. कोरोना के समय बच्चे मोबाइल को इतना ज्यादा इस्तेमाल करने लग गए कि अब यह उनकी आदत से ज्यादा लत बन चुका है. और जब कोई भी आदत लत बन जाती है तो उसका परिणाम नुकसान ही होता है.
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है. यहां एक नाबालिग ने महज इसलिए अपनी मां की हत्या कर दी, क्यों कि उसे मोबाइल पर गेम खेलने के लिए मना किया गया था. इसके बाद से बच्चों की मानसिकता को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. यह घटना दिखाती है कि हिंसक मोबाइल गेम बच्चों के दिमाग पर गहरा असर डालते हैं. ये मोबाइल गेम्स किस तरह से बच्चों की मानसिक विकास पर प्रभाव डाल रहे हैं, यह जानने के लिए आजतक ने बात की सर गंगा राम अस्पताल के चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉक्टर धीरेन गुप्ता से.
चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉक्टर धीरेन गुप्ता ने बताया कि कोरोना के बाद से बच्चों का स्क्रीन टाइम बहुत ज्यादा बढ़ गया है. कोरोना के समय बच्चे मोबाइल को इतना ज्यादा इस्तेमाल करने लग गए कि अब यह उनकी आदत से ज्यादा लत बन चुका है. और जब कोई भी आदत लत बन जाती है तो उसका परिणाम नुकसान ही होता है.
उन्होंने कहा, ऐसे में जब बच्चे वीडियो गेम या मोबाइल पर किसी भी तरह का गेम खेलते हैं तो उसे सच मान लेते हैं. दरअसल बच्चों में यह खासियत होती है कि जो सामने होता है वह उस बात को सच मान लेते हैं. उन्हें सच और भ्रम के बीच तुलना करने की बौद्धिक क्षमता नहीं होती. इसीलिए जब भी बच्चे गेम खेलते हैं तो उस गेम के अंदर चले जाते हैं और अपने आप को उस गेम का एक किरदार मानने लगते हैं. जिस तरह से उस गेम या खेल में घटनाएं होती हैं बच्चे भी उसी तरह का बर्ताव करते नजर आते हैं.
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डॉक्टर गुप्ता बताते हैं कि लखनऊ वाले मामले में भी इसी तरह का कुछ बर्ताव बच्चे में देखने को मिला. डॉ गुप्ता का कहना है कि हो सकता है कि बच्चे ने कहीं और कहीं अपने आप को पब्जी गेम का हिस्सा मान लिया हो और वह उन्हें किरदारों को अपने निजी जिंदगी में दोहराने की कोशिश कर रहा था जिसके चलते उसने यह भयावह कदम उठाया.
वैसे देखा जाए तो लगातार मोबाइल चलाने के कारण बच्चों का बर्ताव बहुत एग्रेसिव हो गया है. वे लगातार इंटरनेट के आदि होते जा रहे हैं. वे बात-बात पर या तो रूठ जाते हैं या फिर गुस्सा हो जाते हैं. इससे उनके मेंटल कंडीशन पर भी बहुत असर पड़ रहा है.

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