
हाईकोर्ट में केजरीवाल ने गिरफ्तारी को बताया स्क्रिप्टेड, तो ED ने क्यों किया 'मर्डर केस' और 'आतंकवाद' का जिक्र?
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आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह तिहाड़ जेल से रिहा हो चुके हैं. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की घर वापसी पर आज यानी बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई है. इस सुनवाई के दौरान ईडी के वकील और केजरीवाल के वकील की तरफ से अपने-अपने पक्ष में दलीलें पेश की गई.
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह तिहाड़ जेल से रिहा हो चुके हैं. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की घर वापसी पर आज यानी बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई है. इस सुनवाई के दौरान ईडी के वकील और केजरीवाल के वकील की तरफ से अपने-अपने पक्ष में दलीलें पेश की गई. केजरीवाल की तरफ से अपनी गिरफ्तारी को स्क्रिप्टेड बताया गया तो ईडी के वकील ने इस केस में मर्डर और आतंकवादी घटना का जिक्र किया.
दिल्ली हाईकोर्ट में अरविंद केजरीवाल की तरफ से गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर बहस के दौरान उनके वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, ''चुनाव के बीच गिरफ्तारी क्यों? चुनाव में हिस्सा लेने से रोका जा रहा है. आम आदमी पार्टी को तोड़ने की कोशिश हो रही है. बहुत पहले के घोटाले का गलत इस्तेमाल नॉन प्लेइंग लेबल फील्ड बनाने के लिए किया जा रहा है. ईडी का पहला समन अक्टूबर में जारी किया गया था. लेकिन गिफ्तारी मार्च में जाकर हुई है.''
अभिषेक मनु सिंघवी की दलीलों का जवाब ईडी ने भी दिया. एएसजी एस वी राजू ने कहा, ''मान लीजिए कि कोई राजनीतिक व्यक्ति चुनाव से दो दिन पहले हत्या कर देता है. क्या उसे गिरफ्तार नहीं किया जाएगा? यदि हम प्रॉपर्टी अटैच करेंगे तो ये कहेंगे कि चुनाव है और हमें शामिल नहीं होने दे रहे है और नहीं करेंगे तो ये दलील देंगे कि क्या कुछ मिला. कोई रिकवरी नहीं हुई.'' 5 घंटे तक चली बहस में बुधवार को जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने फैसला सुरक्षित रख लिया.
अरविंद केजरीवाल की तरफ से कहा गया कि उनके खिलाफ कहीं कुछ भी नहीं मिला है. इस पर ईडी की तरफ से कहा गया, ''यह दलील ही बेतुकी है कि मेरे पास पैसा नहीं मिला. यदि आपने किसी और को दे दिया हो तो आपके घर पर कहां से मिलेगा? गोवा में खर्च कर दिया हो, विदेश भेज दिया हो, कहां से मिलेगा? लेकिन क्या इससे बेगुनाही हो गई आपकी. कोई मर्डर हो जाए. लेकिन लाश न मिले तो क्या कत्ल का मुकदमा नहीं चलता?''
ईडी की तरफ से कोर्ट में कहा गया कि कई ऐसे मामलों में लोगों को सजा मिली है. जब ऐसे प्रभावशाली लोग अपराध मे शामिल हों तो उनके खिलाफ सबूत जुटाना मुश्किल है, इसलिए कानून यह है कि जब ऐसे लोग शामिल हों तो सरकारी गवाहों पर भरोसा किया जा सकता है. केजरीवाल के प्रति गवाहों के बयान हमारे पास हैं. इनके अलावा व्हाट्सएप चैट और हवाला ऑपरेटरों के बयान भी हैं. ऐसा नहीं है कि हम अंधेरे में तीर चला रहे हैं. हमारे पास बहुत सारा डेटा है.
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