
हरीश राणा के पैसिव यूथेनेशिया प्रोसेस में लग सकते हैं दो हफ्ते, धीरे-धीरे वापस लिया जाएगा लाइफ सपोर्ट
AajTak
दिल्ली एम्स ने 31 वर्षीय हरीश राणा के लिए पैसिव यूथेनेशिया प्रक्रिया शुरू कर दी है. इस के लिए हरीश को शनिवार को गाजियाबाद स्थित आवास से एम्स के डॉ. बीआर अंबेडकर संस्थान रोटरी कैंसर अस्पताल की पैलिएटिव केयर यूनिट में शिफ्ट किया गया है, जहां धीरे-धीरे हरीश के लाफ सपोर्ट सिस्टम को वापस लिया जाएगा, ताकि शरीर स्वाभाविक रूप से शांत हो जाए.
सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद एम्स दिल्ली ने 13 साल से कोमा में चल रहे हरीश राणा के लिए पैसिव यूथेनेशिया (निष्क्रिय इच्छामृत्यु) का प्रोसेस शुरू कर दी है. इसके लिए विशेषज्ञों की एक विशेष टीम गठित की गई है जो आने वाले दिनों में इस पूरी प्रक्रिया को संपन्न करेगी. सूत्रों के अनुसार, हरीश के मामले में पूरी प्रक्रिया को पूरा होने में दो से तीन हफ्ते का वक्त लग सकता है. भारत में पहली बार इस प्रक्रिया को लागू करने के लिए एनेस्थीसिया और पैलिएटिव मेडिसिन विभाग की प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष डॉ. सीमा मिश्रा के नेतृत्व में एक विशेष चिकित्सा दल का गठन किया गया है. इस टीम में न्यूरो सर्जरी, ऑन्को-एनेस्थीसिया और पैलिएटिव मेडिसिन तथा मनोचिकित्सा विभागों के डॉक्टर शामिल हैं. इस टीम का मुख्य उद्देश्य मृत्यु में जल्दबाजी में करना नहीं, बल्कि जीवन रक्षक उपायों को धीरे-धीरे हटाकर प्राकृतिक मृत्यु की अनुमति देना है. इसमें मरीज को पोषण सहायता और दवाओं से धीरे-धीरे दूर किया जाता है. साथ ही ये सुनिश्चित किया जाता है कि उन्हें कोई दर्द या परेशानी न हो. इसके लिए 'पैलिएटिव सीडेशन' का इस्तेमाल किया जाएगा.
पैलिएटिव केयर यूनिट में किया गया शिफ्ट प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार को हरीश राणा को उनके गाजियाबाद स्थित आवास से एम्स के डॉ. बीआर अंबेडकर संस्थान रोटरी कैंसर अस्पताल की पैलिएटिव (शांति देने वाला) देखभाल यूनिट (पैलिएटिव केयर यूनिट) में शिफ्ट किया गया है. वहीं, हरीश को अस्पताल ले जाने से पहले गाजियाबाद स्थित उनके घर पर एक भावुक विदाई दी गई. ब्रह्मकुमारी संस्था की सदस्य सिस्टर लवली ने हरीश के माथे पर तिलक लगाकर उन्हें शांति से सोने और सबको माफ करने का संदेश दिया. परिवार के करीबी सदस्यों के अनुसार, पिछले 13 वर्षों के कठिन समय में आध्यात्मिकता ने ही उन्हें सहारा दिया है. माता-पिता की बढ़ती उम्र और हरीश के भविष्य की चिंता ने उन्हें इस कठिन, लेकिन आवश्यक फैसला लेने को मजबूर किया.
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिसाहिक फैसला हरीश के पिता की याचिका पर ऐतिसाहिक फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ये सक्रिय इच्छा मृत्यु नहीं, बल्कि लाइफ सस्टेनिंग ट्रीटमेंट को वापस लेना है. क्योंकि मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में हरीश की स्थिति में सुधार की गुंजाइशों से इनकार कर दिया था और कहा कि इलाज जारी रखने से उनका न्यूरोलॉजिकल फंक्शन वापस नहीं आएगा.
जरूरी था फैसला वहीं, हरीश के पिता अशोक राणा ने इस फैसले को बहुत-ही दर्दनाक, लेकिन जरूरी बताया. उनका मानना है कि ये निर्णय उन कई परिवारों के लिए एक मिसाल बनेगा, जिनके अपने इसी तरह की लाइलाज स्थिति से जूझ रहे हैं. डॉक्टरों के अनुसार, पैसिव यूथेनेशिया का अर्थ पोषण और ऑक्सीजन सपोर्ट को धीरे-धीरे कम करना है, ताकि शरीर स्वाभाविक रूप से शांत हो जाए. दिल्ली एम्स के ऑन्को-एनेस्थीसिया, दर्द और पैलिएटिव केयर विभाग की पूर्व प्रमुख डॉ. सुषमा भटनागर का कहना है कि इस प्रक्रिया में आम तौर पर पर्याप्त दर्द निवारण सुनिश्चित करते हुए पोषण संबंधी सहायता को धीरे-धीरे रोका या बंद किया जाता है. रोगी को दर्द से राहत दिलाने के लिए उसे पैलिएटिव सेडेशन दिया जाता है. इस प्रक्रिया का उद्देश्य ये सुनिश्चित करना है कि मरीज को कोई कष्ट न हो. अस्पताल प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां इस पूरी प्रक्रिया के दौरान गोपनीयता और मर्यादा बनाए रखने के लिए समन्वय कर रही हैं. ये मामला भारत में चिकित्सा और कानूनी इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ रहा है, जहां मृत्यु के अधिकार को गरिमा के साथ जोड़ा गया है.

युद्ध के मोर्चे पर ये समझ में नहीं आ रहा है कि इस युद्ध में जीत कौन रहा है. जिस ईरान को समझा जा रहा है कि सुप्रीम लीडर के मारे जाने के बाद वो सरेंडर कर देगा. वो कहीं से भी पीछे हटता नहीं दिख रहा है. बल्कि ईरान तो और ज्यादा अग्रेसिव हो गया है. और इजरायल के अलावा उसने यूएई का बुरा हाल किया हुआ है. दुबई को तो ईरान ने धुआं धुआं कर दिया. दुबई का हाल ये है कि उसकी ग्लोबल कैपिटल वाली इमेज को ईरान के हालिया हमलों से बहुत बड़ा डेंट लगा है.

पश्चिम एशिया में जंग से तेल और गैस की किल्लत की आशंका के बीच भारत के लिए अच्छी खबर है. भारतीय जहाज शिवालिक कतर से लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस लेकर भारत आ गया है, एलपीजी से लदा भारतीय जहाज शिवालिक गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर पहुंचा है. ये जहाज लगभग 46 हजार मीट्रिक टन LPG लेकर आया है, एक घरेलू सिलेंडर में लगभग 14.2 किलोग्राम LPG भरी जाती है. इस तरह से 46 हजार मीट्रिक टन में 32.4 लाख घरेलू सिलेंडर भरे जा सकते हैं. बता दें कि 14 मार्च को ईरान ने शिवालिक को हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की इजाजत दी थी. वहीं, जहाज नंदा देवी और जग लाडकी कल तक भारत पहुंच सकता है. नंदा देवी जहाज पर भी 46,000 टन LPG लदा है.

युद्ध के बीच भारत का शिवालिक जहाज मुंद्रा पोर्ट पहुंचा है. 45 हजार मीट्रिक टन LPG लेकर शिवालिक पहुंचा है. कल नंदा देवी जहाज भी LPG की सप्लाई लेकर पहुंच रहा है. ईरान से अमेरिका-इजरायल के युद्ध का तीसरा हफ्ता शुरू हो चुका है. ईरान के खिलाफ इस युद्ध में प्रलय की स्थिति तो है लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप कहीं से भी निर्णायक भूमिका में नजर नहीं आ रहे. होर्मुज का समंदर न सिर्फ ट्रंप के लिए सैन्य चुनौती बन गया है, बल्कि कूटनीतिक झटके भी उन्हें मिलते दिख रहे हैं.

पश्चिम बंगाल में सियासी समर का शंखनाद हो चुका है. लेकिन आचार संहिता लगते ही चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के ज्यादातर सभी बड़े अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं. DGP, कोलकाता पुलिस कमिश्नर समेत गृह सचिव और मुख्य सचिव के तबादले को टीएमसी चुनाव आयोग और मोदी सरकार पर हमलावर है. वो इसे सत्ता का दुरुपयोग बता रही है. चुनाव आयोग पर तो विपक्ष पहले से हमलावर है. विपक्षी गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों में महाभियोग का नोटिस पेश कर चुका है. इसी महाभियोग को लेकर कल चुनाव आयुक्त से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि, वो राजनीतिक मसलों में उलझना नहीं चाहते. इधर, ममता बनर्जी मोदी सरकार से एसआईआर से लेकर एलपीजी किल्लत तक के हर मुद्दे पर दो-दो हाथ करने को बेकरार हैं. विपक्ष तबादलों को लेकर चुनाव आयोग को कठघरे में खड़ा कर रहा है. लेकिन सवाल है कि, क्या बड़े अधिकारियों के तबादले पर चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाना जायज है? और सवाल ये भी क्या आत्मविश्वास से भरी बीजेपी इस बार ममता बनर्जी का विजय रथ रोक पाएगी.

सबसे पहले बात ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची की. अराघची ने दो टूक कहा है कि तेहरान ने सीजफायर की मांग नहीं की है. ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि युद्ध का अंत इस तरह होना चाहिए कि ये दोबारा न हो. उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका से किसी तरह की कोई बातचीत या संदेश का आदान-प्रदान नहीं हुआ है. होर्मुज को लेकर उन्होंने बड़ी बात कही है. उनका कहना है कि होर्मुज सिर्फ दुश्मनों के लिए और उनके लिए बंद है जो उनका समर्थन कर रहे हैं.

बिहार के छपरा के रहने वाले बॉडीबिल्डर राजकुमार ने 38 साल की उम्र में पहली बार जिम जाना शुरू किया और कुछ ही वर्षों में कई चैंपियनशिप जीतकर Mr India का खिताब हासिल किया. गरीबी के कारण आज भी वह दिल्ली की सड़क पर नान का ठेला लगाकर परिवार का पालन करते हैं, लेकिन उनका सपना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करना है.







