
बंगाल में अफसरों के ट्रांसफर पर ममता बनर्जी का विरोध, चुनाव आयोग के फैसले पर जताई आपत्ति
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बंगाल में चुनाव आयोग ने चुनाव की तारीखों की घोषणा करने के बाद कई वरिष्ठ अधिकारियों का ट्रांसफर कर दिया है. इस फैसले से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नाराज हैं और उन्होंने इसे लेकर चुनाव आयोग को पत्र लिखा है. मुख्यमंत्री ममता ने कहा कि इस कदम से संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचा है.
पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनाव के तारीखों का ऐलान कर दिया है. चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ प्रदेश में बड़े स्तर पर प्रशासनिक बदलाव किए गए हैं. चुनाव आयोग ने प्रदेश के कई वरिष्ठ अधिकारियों को बदलने का आदेश दिया हैं. आयोग के इस फैसले को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नाराज़ हैं. उन्होंने आयोग को पत्र लिखकर आपत्ति जताई है.
मुख्यमंत्री ने इस पत्र में कहा है कि आयोग ने मुख्य सचिव, गृह औj हिल अफेयर्स विभाग के सचिव तथा पुलिस महानिदेशक और महानिरीक्षक के तबादले का आदेश 15 और 16 मार्च को जारी किया, जबकि इसी दौरान पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की घोषणा की गई थी.
ममता बनर्जी ने इन तबादलों को मनमाना और अनुचित बताया है. उन्होंने कहा कि इन अधिकारियों के खिलाफ चुनाव प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी या लापरवाही का कोई आरोप नहीं था. उन्होंने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि उसने स्थापित परंपरा का उल्लंघन किया है, जिसमें आम तौर पर राज्य सरकार से परामर्श करके ही रिक्त पदों के लिए तीन-तीन अधिकारियों के नामों का पैनल मांगा जाता है.
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मुख्यमंत्री ने पत्र में यह भी कहा कि बिना किसी समन्वय के लिए गए ऐसे कदम सहकारी संघवाद और लोकतांत्रिक शासन के मूल सिद्धांतों के खिलाफ हैं. उन्होंने चुनाव आयोग से आग्रह किया है कि भविष्य में चुनाव संबंधी फैसले लेते समय राज्य सरकार के साथ आवश्यक समन्वय बनाए रखा जाए, जिससे चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और व्यवस्था की संस्थागत विश्वसनीयता बनी रहे.
ममता बनर्जी ने कहा कि चुनाव आयोग के ऐसा कदम न केवल राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन है, बल्कि इससे शासन व्यवस्था की गरिमा भी प्रभावित होती है, इसलिए बेहतर होगा कि दोनों पक्ष मिलकर राज्य में स्वस्थ और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करें.

युद्ध के मोर्चे पर ये समझ में नहीं आ रहा है कि इस युद्ध में जीत कौन रहा है. जिस ईरान को समझा जा रहा है कि सुप्रीम लीडर के मारे जाने के बाद वो सरेंडर कर देगा. वो कहीं से भी पीछे हटता नहीं दिख रहा है. बल्कि ईरान तो और ज्यादा अग्रेसिव हो गया है. और इजरायल के अलावा उसने यूएई का बुरा हाल किया हुआ है. दुबई को तो ईरान ने धुआं धुआं कर दिया. दुबई का हाल ये है कि उसकी ग्लोबल कैपिटल वाली इमेज को ईरान के हालिया हमलों से बहुत बड़ा डेंट लगा है.

पश्चिम एशिया में जंग से तेल और गैस की किल्लत की आशंका के बीच भारत के लिए अच्छी खबर है. भारतीय जहाज शिवालिक कतर से लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस लेकर भारत आ गया है, एलपीजी से लदा भारतीय जहाज शिवालिक गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर पहुंचा है. ये जहाज लगभग 46 हजार मीट्रिक टन LPG लेकर आया है, एक घरेलू सिलेंडर में लगभग 14.2 किलोग्राम LPG भरी जाती है. इस तरह से 46 हजार मीट्रिक टन में 32.4 लाख घरेलू सिलेंडर भरे जा सकते हैं. बता दें कि 14 मार्च को ईरान ने शिवालिक को हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की इजाजत दी थी. वहीं, जहाज नंदा देवी और जग लाडकी कल तक भारत पहुंच सकता है. नंदा देवी जहाज पर भी 46,000 टन LPG लदा है.

युद्ध के बीच भारत का शिवालिक जहाज मुंद्रा पोर्ट पहुंचा है. 45 हजार मीट्रिक टन LPG लेकर शिवालिक पहुंचा है. कल नंदा देवी जहाज भी LPG की सप्लाई लेकर पहुंच रहा है. ईरान से अमेरिका-इजरायल के युद्ध का तीसरा हफ्ता शुरू हो चुका है. ईरान के खिलाफ इस युद्ध में प्रलय की स्थिति तो है लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप कहीं से भी निर्णायक भूमिका में नजर नहीं आ रहे. होर्मुज का समंदर न सिर्फ ट्रंप के लिए सैन्य चुनौती बन गया है, बल्कि कूटनीतिक झटके भी उन्हें मिलते दिख रहे हैं.

पश्चिम बंगाल में सियासी समर का शंखनाद हो चुका है. लेकिन आचार संहिता लगते ही चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के ज्यादातर सभी बड़े अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं. DGP, कोलकाता पुलिस कमिश्नर समेत गृह सचिव और मुख्य सचिव के तबादले को टीएमसी चुनाव आयोग और मोदी सरकार पर हमलावर है. वो इसे सत्ता का दुरुपयोग बता रही है. चुनाव आयोग पर तो विपक्ष पहले से हमलावर है. विपक्षी गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों में महाभियोग का नोटिस पेश कर चुका है. इसी महाभियोग को लेकर कल चुनाव आयुक्त से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि, वो राजनीतिक मसलों में उलझना नहीं चाहते. इधर, ममता बनर्जी मोदी सरकार से एसआईआर से लेकर एलपीजी किल्लत तक के हर मुद्दे पर दो-दो हाथ करने को बेकरार हैं. विपक्ष तबादलों को लेकर चुनाव आयोग को कठघरे में खड़ा कर रहा है. लेकिन सवाल है कि, क्या बड़े अधिकारियों के तबादले पर चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाना जायज है? और सवाल ये भी क्या आत्मविश्वास से भरी बीजेपी इस बार ममता बनर्जी का विजय रथ रोक पाएगी.

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