
हमास से सीजफायर के बाद इजरायल ने भारत को लेकर क्या कहा?
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इजरायल की राददूत रोनी येदिदिया क्लेन ने कहा कि इजरायली दूतावास भारत सहित अपने समकक्षों के साथ लगातार संपर्क रहा. जब कुछ होता है तो हम अपने समकक्षों के साथ लगातार संपर्क में रहते हैं. जैसे भारत में विदेश मंत्रालय के साथ हम संपर्क में रहे.
भारत में इजरायल की डिप्टी राजदूत रोनी येदिदिया क्लेन ने इजरायल और फिलिस्तीन के चरमपंथी गुट हमास के बीच संघर्षविराम का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि इजरायल मानता है कि अमेरिका सहित कुछ अन्य देशों की तरह भारत ने इस मामले पर 'सार्वजनिक' तौर पर समर्थन जाहिर नहीं किया. लेकिन उसे इजरायली कार्रवाई की जानकारी थी. (फोटो-Getty Images) वर्चुअल प्रेस कॉन्प्रेंस में शुक्रवार को रोनी येदिदिया क्लेन ने कहा, 'हमने हमास से संघर्षविराम समझौता किया है. हमें उम्मीद है कि हमास की तरफ से अब और फायरिंग नहीं होगी.' उन्होंने कहा कि जमीनी हकीकत यह तय करेगी कि मिस्र की मध्यस्थता से युद्धविराम कैसा रहेगा. (फोटो-ट्विटर/@RonyYedidia)
ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है. अयातुल्ला अली खामेनेई की हुकूमत ने प्रदर्शनकारियों को कुचलने के लिए फांसी जैसे खौफनाक कदम उठाने का फैसला किया तो अमेरिका ने सीधे एक्शन की चेतावनी दे डाली. हालांकि बाद में ईरान और ट्रंप के ताजा बयानों ने दुनिया को थोड़ी राहत दी. मगर ईरान संकट अब सिर्फ एक देश का नहीं, बल्कि वैश्विक टकराव का संकेत बनता जा रहा है.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया है जो पहले वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो को मिला था. मचाडो ने यह पुरस्कार ट्रंप को सौंपा और ट्रंप ने इसे खुशी-खुशी स्वीकार किया. यह घटना राजनीतिक जगत में खास तूल पकड़ रही है और दोनों नेताओं के बीच इस सम्मान के आदान-प्रदान ने चर्चा का विषय बना है. ट्रंप के लिए यह एक बड़ा सम्मान है जिसका उन्होंने खुले दिल से स्वागत किया.

अमेरिका ने ईरान पर हमले की चेतावनी के बाद अपने कदम फिलहाल वापस ले लिए हैं. हाल तक अमेरिका ईरान की हवाई और समुद्री घेराबंदी कर रहा था, लेकिन अब उसने मामले को डिप्लोमेसी के माध्यम से सुलझाने का अंतिम मौका दिया है. ईरान ने प्रदर्शनकारियों को फांसी देने का फैसला किया था, जिसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने आर्मी को हमले के लिए तैयार रहने का आदेश दिया था.

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पाकिस्तान एक बार फिर भारत की सीमा में ड्रोन भेज रहा है. जनवरी से जम्मू कश्मीर के कई इलाकों में छोटे और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन देखे गए हैं. सेना के मुताबिक ये आत्मघाती ड्रोन नहीं बल्कि निगरानी के लिए भेजे गए यूएवी हैं. माना जा रहा है कि पाकिस्तान भारत की सुरक्षा तैयारियों और प्रतिक्रिया समय को परखने की कोशिश कर रहा है.








