
सेकुलर कोड, रिफॉर्म, महिला अत्याचार और करप्शन... लाल किले से पीएम मोदी के भाषण की 10 बड़ी बातें
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर देश को संबोधित किया. पीएम ने कहा, हमारे यहां जाति, पात और पंथ से ऊपर उठकर हर घर तिरंगा फहराया जाता है. आज देश के 3 करोड़ परिवारों को नल से जल पहुंच रहा है. नई शिक्षा नीति में मातृ भाषा को बल मिला. भाषा टैलेंट के रास्ते नहीं आनी चाहिए. इकोनॉमी को सबसे तेज बनाए रखने वाला देश भारत है. हम 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालते हैं. वो दिन दूर नहीं, जब भारत इंडस्ट्रियल मैन्यूफैक्चरिंग का हब बनेगा. दुनिया की बड़ी कंपनियां भारत में निवेश करना चाहते हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय ध्वज फहराया. उसके बाद देश को संबोधित किया. पीएम मोदी ने 98 मिनट लंबे अपने भाषण में सेकुलर कोड, रिफॉर्म, महिला अत्याचार, करप्शन और मेडिकल एजुकेशन से लेकर नई शिक्षा नीति का भी जिक्र किया. पीएम मोदी का कहना था कि अब हम चाहते हैं कि आत्मनिर्भर बनें. दुर्भाग्य से हमारे देश में आजादी के बाद लोगों को एक प्रकार के माई-बाप कल्चर से गुजरना पड़ा. सरकार से मांगते रहो, सरकार के सामने हाथ फैलाते रहो. हमने गवर्नेंस के इस मॉडल को बदला है. आज सरकार खुद लाभार्थियों के पास जाती है. पढ़िए पीएम मोदी के भाषण की 10 बड़ी बातें...
1. भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी...
लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी. पीएम मोदी का कहना था कि मैं भ्रष्टाचारियों से निपटकर रहूंगा. क्या कोई कल्पना कर सकता है कि मेरे देश में कुछ ऐसे लोग निकल रहे हैं, जो भ्रष्टाचार का महिमामंडन कर रहे हैं. समाज में इस प्रकार के बीज बोने का प्रयास हो रहा है, वो स्वस्थ समाज के लिए चुनौती है. भ्रष्टाचारियों से दूरी बनाना सही होता है, उसका महिमामंडन नहीं होना चाहिए. पीएम मोदी का कहना था कि मैं देशवासियों कहना चाहता हूं कि हम नेकनीयत से राष्ट्र के प्रति अपने समर्पण से, हम विपरीत मार्ग पर जाने वाले लोगों के दिल जीतेंगे. राष्ट्र के सपनों को साकार करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे. हम बदनियत वालों को नेक नियत से जीतेंगे. हमारा हर देशवासी भ्रष्टाचार की दीमक से परेशान रहा है. अन्याय के प्रति उसका गुस्सा राष्ट्र की प्रगति में रुकावट देता है. मैंने इसके लिए काम किया, मुझे अपनी प्रतिष्ठा भी चुकानी पड़े तो चुकाऊंगा.
2. विश्व को दिया संदेश...
पीएम मोदी का कहना था कि हम विश्व में जब समृद्ध थे, तब भी हमने दुनिया को युद्ध नहीं दिया. मैं विश्व समुदाय को विश्वास दिलाता हूं कि आप भारत के संस्कारों को समझिए. भारत के हजारों साल के इतिहास को समझिए. हमें संकट मत मानिए. इस भूमि में विश्व कल्याण का सामर्थ्य है. चुनौतियों को चुनौती देना हमारी फितरत में है. हम संकल्पों की पूर्ति के लिए देशवासियों का भाग्य बदलने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे. हम नेक नीयत से जीतेंगे. पीएम ने बांग्लादेश की हिंसा का भी जिक्र किया और कहा, बांग्लादेश में अशांति के बीच हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर 140 करोड़ भारतीय भी चिंतित हैं. भारत की सदैव यही इच्छा रही है कि उसके पड़ोसी देश समृद्धि और शांति के मार्ग पर चलें. एक पड़ोसी देश के तौर पर बांग्लादेश में जो कुछ भी हुआ है, मैं उससे जुड़ी चिंता को समझ सकता हूं. मुझे उम्मीद है कि वहां स्थिति जल्द से जल्द सामान्य हो जाएगी. 140 करोड़ देशवासियों की चिंता वहां हिंदुओं और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. आने वाले दिनों में भारत अपनी 'विकास यात्रा' में "बांग्लादेश के लिए शुभकामनाएं' देता रहेगा क्योंकि हम मानव जाति के कल्याण के बारे में सोचते हैं.
3. विकसित भारत का संकल्प...

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