
सुप्रीम कोर्ट ने की ‘फ्रीबीज़’ की आलोचना, कहा- ऐसी नीतियों पर पुनर्विचार का समय आ गया है
The Wire
शीर्ष अदालत ने तमिलनाडु की द्रमुक सरकार को मुफ्त बिजली वितरण नीति के लिए फटकारते हुए कहा कि यदि राज्य ज़रूरतमंद ग़रीबों की मदद करते हैं तो यह पूरी तरह से समझ में आता है. लेकिन जो वहन कर सकते हैं उन्हें भी मुफ्त वितरण की सुविधा क्या तुष्टीकरण की नीति नहीं हैं.
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (19 फरवरी) को राजनीतिक दलों द्वारा ‘फ्रीबीज़’ (निशुल्क दी जाने वाली सौगात) संस्कृति के चलन को बढ़ावा देने की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि देश के आर्थिक विकास में बाधा डालने वाली ऐसी नीतियों पर पुनर्विचार करने का समय आ गया है.
हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक, अदालत ने तमिलनाडु की द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सरकार को मुफ्त बिजली वितरण नीति के लिए फटकार लगाते हुए कहा कि यदि राज्य जरूरतमंद गरीबों की मदद करते हैं तो यह पूरी तरह से समझ में आता है. लेकिन जो वहन कर सकते हैं उन्हें भी मुफ्त में वितरण की सुविधा क्या तुष्टीकरण की नीति नहीं हैं.
उल्लेखनीय है कि न्यायालय ने तमिलनाडु विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (टीएनपीडीसीएल) की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही. याचिका में कहा गया है कि उपभोक्ताओं की आर्थिक स्थिति पर ध्यान दिए बिना सभी को मुफ्त बिजली देने का प्रस्ताव किया गया था.
इस याचिका पर सुनवाई करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सवाल उठाया कि क्या राज्य सरकारें दीर्घकालिक बुनियादी विकास की तुलना में अल्पकालिक राजनीतिक तुष्टीकरण को प्राथमिकता दे रही हैं.
इस दौरान अदालत ने चेतावनी दी कि करदाताओं के पैसे से की जाने वाली अंधाधुंध फिजूलखर्ची राजकोषीय अनुशासन और आर्थिक स्थिरता को कमजोर कर सकती है.
मालूम हो कि अदालत की यह टिप्पणियां आगामी विधानसभा चुनाव से कुछ ही सप्ताह पहले आई हैं.

आरजी कर अस्पताल में बलात्कार और हत्या की शिकार जूनियर डॉक्टर की मां ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने भाजपा के उम्मीदवार के रूप में पनिहाटी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने पर सहमति दे दी है. प्रदेश भाजपा की ओर से इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है. हालांकि भाजपा ने उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की है, जिसमें इस सीट पर कोई प्रत्याशी घोषित नहीं किया गया है.

केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि देशभर में 2017 से अब तक सीवर और सेप्टिक टैंक की ख़तरनाक सफाई के दौरान 622 सफाईकर्मियों की मौत हो चुकी है. 539 परिवारों को पूरा मुआवज़ा दिया गया, जबकि 25 परिवारों को आंशिक मुआवज़ा मिला. मौतों के मामले में उत्तर प्रदेश 86 के साथ सबसे ऊपर है, इसके बाद महाराष्ट्र (82), तमिलनाडु (77), हरियाणा (76), गुजरात (73) और दिल्ली (62) का स्थान है.

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कोटद्वार के ‘मोहम्मद’ दीपक की याचिका पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा कि एक 'संदिग्ध आरोपी' होने के नाते वह अपनी मनचाही राहत, जैसे सुरक्षा और पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ विभागीय जांच की मांग नहीं कर सकते. दीपक ने बीते महीने कोटद्वार में एक मुस्लिम बुज़ुर्ग के साथ दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा की जा रही बदसलूकी का विरोध किया था.

यह त्रासदी नवंबर 2014 में बिलासपुर ज़िले के नेमिचंद जैन अस्पताल (सकरी), गौरेला, पेंड्रा और मरवाही में आयोजित सरकारी सामूहिक नसबंदी शिविरों के दौरान हुई थी. ज़िला अदालत ने आरोपी सर्जन को ग़ैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया और दो साल की क़ैद, 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया. साथ ही पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया.

वी-डेम की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के अंत तक दुनिया में 92 तानाशाही वाले देश और 87 लोकतांत्रिक देश मौजूद थे. भारत अभी भी 'चुनावी तानाशाह' बना हुआ है, इस श्रेणी में वह 2017 में शामिल हुआ था. 179 देशों में सें भारत लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स में 105वें स्थान पर है. पिछले वर्ष यह 100वें स्थान पर था.

बीते 3 फरवरी को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान लोकसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद अनुशासनहीन व्यवहार के लिए सात कांग्रेस सांसदों और एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद को निलंबित कर दिया गया था. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें इन सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी.

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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच केंद्र सरकार भले ही एलपीजी की किल्लत से इनकार कर रही है लेकिन गैस एजेंसियों पर लंबी क़तारें हैं. गैस की किल्लत से जूझते लोगों के वीडियो सोशल मीडिया पर आ रहे हैं. वहीं, दिल्ली में कुछ अटल कैंटीन बंद हैं, कई हॉस्टल मेस और गुरुद्वारों में लंगर भी सिलेंडर की कमी प्रभावित हो रहे हैं.




