
सुप्रीम कोर्ट ने अडानी पोर्ट्स को दी गई चरागाह भूमि वापस लेने संबंधी हाईकोर्ट का आदेश रद्द किया
The Wire
गुजरात सरकार ने साल 2005 में कच्छ ज़िले में मुंद्रा बंदरगाह के पास 231 एकड़ चरागाह भूमि अडानी पोर्ट्स को आवंटित की थी, जिसके ख़िलाफ़ ग्रामीणों ने अदालत का रुख़ किया था. तेरह साल बाद 2024 में सरकार ने हाईकोर्ट में बताया था कि वह अडानी समूह से 184 हेक्टेयर ज़मीन वापस लेगी. अब सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए अधिकारियों को नए सिरे से निर्णय लेने का निर्देश दिया है.
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में गुजरात हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें राज्य के मुंद्रा में अडानी पोर्ट्स को आवंटित 108 हेक्टेयर गौचर (चरागाह) भूमि को वापस लेने का निर्देश दिया गया था.
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल चंदुरकर की पीठ ने कहा कि चरागाह भूमि को वापस लेने का निर्णय और उस पर आधारित हाईकोर्ट के निर्देश, प्रभावित आवंटी को सुनवाई का अवसर दिए बिना पारित किए गए थे, जिससे पूरी प्रक्रिया टिकाऊ नहीं रह जाती.
अदालत ने कहा, ‘इस दृष्टि से हम हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करने के इच्छुक हैं.’ और यह भी नोट किया कि हाईकोर्ट के निर्देश सीधे तौर पर राज्य सरकार के 4 जुलाई 2024 के पुनः-अधिग्रहण (रिज़म्पशन) आदेश से जुड़े थे, जो गांव की चरागाह भूमि से संबंधित था. कोर्ट ने अधिकारियों को इस मामले में नए सिरे से निर्णय लेने का निर्देश दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि यदि अडानी पोर्ट्स ने कोई आपत्ति दाखिल की है तो राज्य प्राधिकरण उसे दो सप्ताह के भीतर विचार करें. साथ ही यह अनिवार्य किया कि नया फैसला लेने से पहले सभी संबंधित पक्षों को सुनवाई का उचित अवसर दिया जाए.
कोर्ट ने आगे आदेश दिया कि 10 जुलाई 2024 को पहले दिए गए निर्देश के अनुसार यथास्थिति (स्टेटस-क्वो) तब तक बनी रहेगी, जब तक राज्य सरकार पुनर्विचार की प्रक्रिया पूरी नहीं कर लेती.
अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य प्राधिकरणों द्वारा नया आदेश पारित किए जाने के बाद गुजरात हाईकोर्ट इस आवंटन से जुड़ी लंबित जनहित याचिका पर स्वतंत्र रूप से आगे की कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा.

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