
सिंदूर का बदला, फिर सिंदूर की वापसी... BSF जवान की पत्नी की बातों में है मोदी के मिशन की ताकत
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सीजफायर के चलते ऑपरेशन सिंदूर रुका हुआ जरूर है, लेकिन बीएसएफ जवान को छोड़ा जाना भी उसी के असर के तौर पर देखा जा रहा है. पाकिस्तान से तीन हफ्ते बाद रिहा किये गये बीएसएफ जवान की पत्नी का तो यही मानना है कि उनका सुहाग भी वैसे ही वापस मिला है, जैसे पहलगाम अटैक का बदला लिया गया.
BSF के जवान पूर्णम कुमार शॉ के 20 दिन बाद लौट आने से पूरा परिवार खुश है - शॉ की पत्नी रजनी ने कह रही हैं, ‘अगर प्रधानमंत्री मोदी हैं तो सब कुछ संभव है.’
पूर्णम कुमार शॉ को पाकिस्तान से छोड़े जाने के बाद वो अटारी-वाघा बॉर्डर से भारत लौट आये. 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकवादी हमला हुआ था, और अगले ही दिन बीएसएफ जवान के गलती से बॉर्डर पार कर लेने के कारण पाकिस्तानी रेंजर्स ने पकड़ लिया था.
पूर्णम की रिहाई के लिए लगातार कोशिशें जारी थीं. कई फ्लैग मीटिंग में भी पाकिस्तानी रेंजर्स पूर्णम शॉ को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हुए. फिर बीएसएफ के डीजीपी ने केंद्रीय गृह सचिव को सारी जानकारी दी.
‘मोदी है तो मुमकिन है’
ये स्लोगन तो नहीं, लेकिन रजनी शॉ ने राहत भरी खुशी का इजहार इसी अंदाज में किया है, ‘...अगर प्रधानमंत्री मोदी हैं तो सब कुछ संभव है… जब 22 अप्रैल को पहलगाम हमला हुआ, 15-20 दिनों के भीतर ऑपरेशन सिंदूर के जरिये हर किसी के सुहाग का बदला लिया… चार पांच दिन बाद मेरे सुहाग को भी वापस ले आये… मैं हाथ जोड़कर दिल से धन्यवाद देना चाहती हूं.’
रजनी शॉ ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, ‘मैं आज बहुत खुश हूं… सुबह एक अधिकारी का फोन आया… मेरे पति ने मुझसे वीडियो कॉल भी की… वो बिल्कुल ठीक हैं… मुझे कहा कि टेंशन मत लो, मैं ठीक हूं.

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