
'सांस तक नहीं ले पा रहे...' गाजीपुर लैंडफिल साइट के धुएं से परेशान दिल्ली-नोएडा के लोगों की आपबीती
AajTak
पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर लैंडफिल साइट पर रविवार शाम को भीषण आग लग गई, आग बुझाने का काम अभी भी जारी है. आग लगने की इस घटना को लेकर अब बीजेपी आम आदमी पार्टी की सरकार पर हमलावर हो गई है.
पूर्वी दिल्ली में गाजीपुर ‘लैंडफिल’ स्थल (कचरा एकत्र करने का स्थान) पर रविवार शाम लगी आग स्थानीय लोगों के लिए मुसीबत बन गई है. आसपास का पूरा क्षेत्र बदबू एवं धुएं से भर गया. आग इस कदर भीषण रही कि धुएं का गुबार आसमान छू रहा था. इस आग की वजह से लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं हैं और लोगों को सांस लेने में घुटन हो रही है. यह धुंआ ना केवल दिल्ली बल्कि उससे सटे नोएडा और गाजियबाद के इलाकों तक फैल गया. 30 से जायदा गाडियां कल से अब तक आग पर काबू पाने में लगी हुई है..
पूरी रात आग को बुझाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चला है लेकिन अभी तक आग पर काबू नहीं पाया जा सका है और कई हिस्से अभी भी धधक रहे हैं. फायर ब्रिगेड की 30 से ज्यादा गाडियां आग पर काबू पाने की कोशिश कर रही हैं. इसके अलावा अन्य उपकरणों की भी मदद ली जा रही है.
दरअसल राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के गाजीपुर और भलस्वा जैसे प्रमुख लैंडफिल साइट्स में आग लगना कोई नई बात नहीं है. हर साल जब गर्मी का मौसम आता है और तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाता है, तो लैंडफिल साइट नरक में तब्दील हो जाती है.
यह भी पढ़ें: घंटों बाद भी नहीं बुझी 'कूड़े के पहाड़' में लगी आग, आज दिल्ली के गाजीपुर लैंडफिल का दौरा करेंगे BJP नेता
परेशान लोगों ने बताई अपनी आपबीती आग लगने से ना केवल दिल्ली के लोगों को दिक्कतें हो रही हैं बल्कि गाजियाबाद और नोएडा तक के लोगों को दिक्कत हो रही है. स्थानीय निवासी नाज़रा ने बताया "मैं यहां रहती हूं और धुएं से आंखों में परेशानी हो रही है... हमें सांस लेने में भी दिक्कत हो रही है. पूरी कॉलोनी परेशान है." नोएडा के रहने वाले सुमित कहते हैं, 'मुझे सांस लेने में दिक्कत हो रही है. प्रशासन लापरवाही बरत रहा है...धुएं का बुजुर्गों पर गंभीर असर होगा.'
एक स्थानीय निवासी ने बताया, "हम 1990 के दशक से इस समस्या का सामना कर रहे हैं. हम मधुमेह, बीपी, थायराइड और आंखों में जलन से जूझ रहे हैं. यहां तक कि छोटे बच्चे भी इससे पीड़ित हैं... आंखों में जलन हो रही है. हम बाहर नहीं जा पा रहे हैं... चाहे दिल्ली सरकार हो या केंद्र सरकार, हमारी समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है .'

झारखंड के लातेहार जिले के भैंसादोन गांव में ग्रामीणों ने एलएलसी कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति गांव में आकर लोगों को ठगने और जमीन हड़पने की कोशिश कर रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो घंटे में अधिकारी सुरक्षित गांव से बाहर निकल सके.

दिल्ली के सदर बाजार में गोरखीमल धनपत राय की दुकान की रस्सी आज़ादी के बाद से ध्वजारोहण में निरंतर उपयोग की जाती है. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के बाद यह रस्सी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने लगी. इस रस्सी को सेना पूरी सम्मान के साथ लेने आती है, जो इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता को दर्शाता है. सदर बाजार की यह रस्सी भारत के स्वाधीनता संग्राम और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी हुई है. देखिए रिपोर्ट.

संभल में दंगा मामले के बाद सीजेएम के तबादले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए थे लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. इस पर सीजेएम का अचानक तबादला हुआ और वकील प्रदर्शन कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है. इस विवाद में राजनीतिक सियासत भी जुड़ी है. हाई कोर्ट के आदेशानुसार जजों के ट्रांसफर होते हैं लेकिन इस बार बहस हुई कि क्या यहां राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया.

दावोस में भारत वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना करने और एक बेहतर भविष्य बनाने के लिए पूरी तैयारी कर रहा है. इस संदर्भ में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से खास बातचीत की गई जिसमें उन्होंने बताया कि AI को लेकर भारत की क्या योजना और दृष्टिकोण है. भारत ने तकनीकी विकास तथा नवाचार में तेजी लाई है ताकि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रह सके. देखिए.

महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों के बाद ठाणे जिले के मुंब्रा क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. एमआईएम के टिकट पर साढ़े पांच हजार से अधिक वोट के अंतर से जीत हासिल करने वाली सहर शेख एक बयान की वजह से चर्चा में हैं. जैसे ही उनका बयान विवादास्पद हुआ, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका बयान धार्मिक राजनीति से जुड़ा नहीं था. सहर शेख ने यह भी कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है और वे उस तरह की राजनीति का समर्थन नहीं करतीं.








