
सरकार ने ही बताया Ujjwala Yojana का सच, 4.3 करोड़ लोगों ने एक बार भी नहीं भरवाया सिलेंडर
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केंद्र सरकार ने बीते दिन संसद में उज्ज्वला योजना के के तहत दिए गए गैस कनेक्शन की रिफिलिंग के आंकड़े बताए. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्यमंत्री रामेश्वर तेली ने राज्यसभा को एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि उज्ज्वला योजना के 4.13 करोड़ लाभार्थियों ने एक बार भी रसोई गैस सिलेंडर को रिफिल नहीं करवाया है.
अगस्त महीने की पहली तारीख को कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में कटौती हुई, लेकिन घरेलू रसोई गैस सिलेंडर (LPG) के दाम जस के तस बने हुए है. सरकार ने सिर्फ प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लभार्थियों के लिए सब्सिडी (LPG Subsidy) बरकरार रखी है. बाकी के LPG उपभोक्ताओं के लिए सब्सिडी को खत्म कर दिया गया है. लेकिन सरकार की तरफ से संसद में पेश किए गए एक आंकड़े से पता चला कि बड़ी संख्या में उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों ने एक बार भी रसोई गैस सिलेंडर रिफिल नहीं करवाया है.
राज्यमंत्री ने बताए आंकड़े
केंद्र सरकार ने बीते दिन संसद में उज्ज्वला योजना के के तहत दिए गए गैस कनेक्शन की रिफिलिंग के आंकड़े बताए. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्यमंत्री रामेश्वर तेली ने राज्यसभा को एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि उज्ज्वला योजना के 4.13 करोड़ लाभार्थियों ने एक बार भी रसोई गैस सिलेंडर को रिफिल नहीं करवाया है. वहीं, 7.67 करोड़ लाभाथिर्यों ने एक ही बार सिलेंडर भरवाया है. विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने उज्ज्वला योजना के लभार्थियों से जुड़ी जानकारी मांगी थी.
साल दर साल का आंकड़ा
रामेश्वर तेली ने बताया कि वर्ष 2017-18 के बीच 46 लाख उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों ने एक भी सिलेंडर रिफिल नहीं कराया. वहीं, एक बार रिफिल कराने वालों का आंकड़ा 1.19 करोड़ रहा. राज्यमंत्री के अनुसार, 2018-19 के दौरान 1.24 करोड़, 2019-20 के दौरान 1.41 करोड़, 2020-21 के दौरान 10 लाख और 2021-22 के दौरान 92 लाख लाभार्थियों ने एक बार भी सिलेंडर नहीं भरवाया. साथ ही उन्होंने एक बार सिलेंडर रिफिल कराने वालों को भी आंकड़े दिए.
कितनी मिलती थी सब्सिडी

आज पूरी दुनिया LNG पर निर्भर है. खासकर भारत जैसे देश, जहां घरेलू गैस प्रोडक्शन कम है, वहां LNG आयात बेहद जरूरी है. लेकिन जैसे ही युद्ध या हमला होता है, सप्लाई चेन टूट जाती है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. कतर जैसे देशों से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर पहुंचने तक यह गैस कई तकनीकी प्रोसेस और जोखिम भरे रास्तों से गुजरती है.












