
संसद के विशेष सत्र में सरप्राइज मिलेगा या ये चार बिल ही पास कराएगी मोदी सरकार?
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सरकार ने संसद के विशेष सत्र के लिए जो एजेंडा जारी किया है, उसमें चार बिल हैं. क्या सरकार यही चार बिल पारित कराएगी या चौंकाने वाली फितरत बरकरार रखते हुए फिर चौंकाएगी?
संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 31 अगस्त को पांच दिन के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की जानकारी दी थी. विपक्षी पार्टियों के नेता जब सरकार को घेरने की रणनीति पर मंथन करने के लिए मुंबई में जुट रहे थे, संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने के ऐलान ने पूरा ध्यान खींचा. सरकार संसद के विशेष सत्र में क्या करने वाली है, इसे लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया. विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाने शुरू कर दिए. कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर संसद के विशेष सत्र का एजेंडा क्या होगा? ये सार्वजनिक करने की मांग की और वे मुद्दे भी बताए जिन पर विपक्षी पार्टियां चर्चा चाहती हैं.
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करीब 15 दिन तक चले अगर-मगर और अटकलों के दौर के बाद संसद के विशेष सत्र के एजेंडे से पर्दा उठ गया है. सरकार ने संसद के विशेष सत्र का एजेंडा सार्वजनिक कर दिया है. केंद्र सरकार संसद के इस विशेष सत्र में चार विधेयक पारित कराने वाली है. इन चार में से दो बिल ऐसे हैं जो हाल ही में संपन्न हुए मॉनसून सत्र के दौरान उच्च सदन यानी राज्यसभा की बाधा पार कर चुके हैं. ये राज्यसभा से पारित होने के बाद लोकसभा में पेंडिंग हैं. वहीं, दो विधेयक ऐसे भी हैं जिन्हें सरकार ने राज्यसभा में पेश तो कर दिया था लेकिन ये मॉनसून सत्र के दौरान पारित नहीं हो पाए थे.
अब सवाल ये उठ रहे हैं कि इन चार विधेयकों में आखिर ऐसा क्या है कि सरकार को इन्हें पारित कराने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाना पड़ गया? आइए नजर डालते हैं उन विधेयकों पर जिन्हें पारित कराना सरकार की ओर से जारी किए गए विशेष सत्र के एजेंडे में शामिल है.
1- अधिवक्ता संशोधन विधेयक 2023
अधिवक्ता संशोधन विधेयक 2023 अगस्त महीने में मॉनसून सत्र के दौरान ही राज्यसभा से पारित हो गया था. ये बिल लोकसभा में पेंडिंग है. ये बिल भी संसद के विशेष सत्र के लिए एजेंडे में है. इस बिल को कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने राज्यसभा में पेश किया था. इस विधेयक में सरकार को कानून की पढ़ाई और प्रशासन में परिवर्तन के लिए कदम उठाने के अधिकार का प्रावधान है. इस बिल में आजादी के पहले के अधिनियमों और अप्रचलित कानून खत्म करने, लीगल प्रैक्टिशनर्स एक्ट 1879 को निरस्त करने, अधिवक्ता अधिनियम 1961 में संशोधन का भी प्रावधान है.

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