
संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में जोरदार हंगामे के आसार, विपक्ष ने बनाया सरकार को घेरने का प्लान
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संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के संकेत मिल रहे हैं. विपक्ष मणिपुर में हिंसा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रेसिप्रोकल टैरिफ की धमकी, संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन पर राजनीतिक हंगामा जैसे मुद्दों पर घेरने का प्लान बना रहा है.
संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण सोमवार से शुरू हो रहा है, जिसमें सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों को लेकर तीखी बहस होने की संभावनाएं हैं. बताया जा रहा है कि विपक्ष मतदाता सूचियों में कथित हेरफेर, मणिपुर में हिंसा और ट्रंप प्रशासन के साथ भारत के संबंधों जैसे मुद्दों को उठाने की योजना बना रहा है. जबकि सरकार का फोकस अनुदान मांगों के लिए संसद की मंजूरी प्राप्त करने, बजटीय प्रक्रिया पूरी करने, मणिपुर बजट के लिए अनुमोदन प्राप्त करने और वक्फ संशोधन विधेयक पारित करने पर होगा.
इसके अलावा गृह मंत्री अमित शाह मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की घोषणा के लिए संसद की मंजूरी के लिए एक वैधानिक प्रस्ताव पेश कर सकते हैं. वहीं, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सोमवार को मणिपुर का बजट भी पेश करेंगी. क्योंकि मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद 13 फरवरी से राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू है.
क्या है विपक्ष का आरोप
विपक्ष ने कहा कि वह डुप्लीकेट मतदाता फोटो पहचान पत्र (ईपीआईसी) संख्या के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में है. बीते दिनों तृणमूल कांग्रेस ने इस मुद्दे को उठाने में मुख्य भूमिका निभाई है, जिसके बाद चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि वह अगले तीन महीनों के अंदर सुधारात्मक कदम उठाएगा. हालांकि, चुनाव आयोग ने टीएमसी के इस दावे को खारिज कर दिया था कि अन्य राज्यों के मतदाताओं को पश्चिम बंगाल में अपने मताधिकार का प्रयोग करने की अनुमति देने के लिए मतदाता सूचियों में हेरफेर किया गया था.
चुनाव आयोग ने ये भी स्पष्ट किया कि कुछ मतदाताओं के मतदाता पहचान पत्र क्रमांक समान हो सकते हैं, लेकिन डेमोग्राफिक इंफॉर्मेशन, विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र और मतदान केंद्र जैसे अन्य जानकारी अलग-अलग होंगे.
टीएमसी के नेता सोमवार को चुनाव आयोग से मुलाकात करेंगे और उन्होंने बजट सत्र के दूसरे चरण के दौरान संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे को उठाने के लिए कांग्रेस, डीएमके, शिवसेना-यूबीटी समेत अन्य विपक्षी दलों को भी एकजुट किया है.

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