
संभल हिंसा: हाईकोर्ट ने पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ केस दर्ज करने का निचली अदालत का आदेश रोका
The Wire
बीते 9 जनवरी को संभल की एक अदालत ने 2024 में संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान कथित पुलिस फायरिंग को लेकर पूर्व सीओ अनुज चौधरी और संभल कोतवाली के पूर्व प्रभारी अनुज तोमर समेत12 पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था. अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उस पर रोक लगा दी है.
नई दिल्ली: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार (10 फरवरी) को निचली अदालत के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें 12 पुलिसकर्मियों – जिसमें पूर्व संभल सर्किल ऑफिसर (सीओ) अनुज चौधरी और पूर्व संभल कोतवाली प्रभारी अनुज तोमर शामिल हैं – के खिलाफ 2024 में संभल मस्जिद सर्वे के दौरान कथित पुलिस फायरिंग में उनकी भूमिका को लेकर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था.
लाइव लॉ के मुताबिक, यह आदेश जस्टिस समीत गोपाल ने अनुज चौधरी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया. यह याचिका मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) विभांशु सुधीर के 9 जनवरी के आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का निर्देश दिया गया था.
साथ ही शिकायतकर्ता को उनकी याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए 14 दिन का समय दिया गया है. तब तक यह स्थगन आदेश प्रभावी रहेगा.
हालांकि, हाईकोर्ट ने जवाबी हलफनामा दाखिल करने के बाद मेंटेनेबिलिटी के सवाल पर विचार करने के लिए खुला छोड़ दिया है.
यह आदेश तब पारित किया गया, जब पीठ ने सरकारी वकीलों – अतिरिक्त महाधिवक्ता (एएजी) मनीष गोयल और सरकारी अधिवक्ता (जीए) एके संद -की दलीलें सुनीं. उन्होंने तर्क दिया कि मजिस्ट्रेट ने कानून के तहत अनिवार्य सुरक्षा प्रावधानों की अनदेखी करते हुए बीएनएसएस की सीमाओं का अतिक्रमण किया है और पुलिस अधिकारियों को मजिस्ट्रेट के समक्ष आरोपों पर अपना पक्ष रखने का कोई अवसर नहीं दिया गया.
दूसरी ओर, शिकायतकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एसएफए नकवी ने याचिका की मेंटेनेबिलिटी का मुद्दा उठाया. उन्होंने दलील दी कि राज्य सरकार गृह विभाग के प्रधान सचिव के अधीन काम करने वाले पुलिस अधिकारियों का समर्थन कर रही है.

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