
शी जिनपिंग और इमरान खान के बयान पर मोदी सरकार ने दिया जवाब
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भारत ने संयुक्त बयान में कश्मीर का जिक्र करने पर पाकिस्तान-चीन को लताड़ लगाई है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा है कि संबंधित पक्ष भारत के आंतरिक मामलों में दखल न दें. भारत ने CPEC को लेकर भी दोनों पक्षों से आपत्ति जताई है.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने हालिया चीन यात्रा के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मिलकर एक संयुक्त बयान जारी किया जिसमें कश्मीर मुद्दे का जिक्र किया गया. अब इसे लेकर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. विदेश मंत्रालय ने इसे खारिज करते हुए कहा है कि पाकिस्तान और चीन भारत के आंतरिक मामलों में दखल न दें. Just in: MEA takes a strong exception to Pak, China joint statement mentioning Kashmir. Slams Pak, China reminding them "not to interfere in matters that are internal affairs of India." Statement: pic.twitter.com/RdGKXvnBKp

ईरान की पार्स गैस फील्ड पर हमले के बाद ईरान ने मिडिल ईस्ट में गैस फील्ड पर हमले की धमकी दी थी. जिसके बाद अब बहरीन के नेचुरल गैस रिफाइनरी पर ईरान ने हमला कर दिया है. बहरीन और सऊदी के बॉर्डर के पास बनी गैस फैसिलिटी पर ईरान ने मिसाइल दागी है. यह हमला इतना खतरनाक था का इसका असर बहरीन और सऊदी को जोड़ने वाले किंग फहाद पुल पर भी पड़ा है. पुल भी डैमेज हो गया है.

ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारिजानी की सैन्य हमले में मौत के बाद देश में शोक है. हमले में उनके बेटे, डिप्टी और कई सुरक्षाकर्मी भी मारे गए. राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने उन्हें करीबी साथी बताते हुए कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि खून का बदला लेंगे. लारिजानी को सुरक्षा और राजनीति के बीच अहम कड़ी माना जाता था. संसद अध्यक्ष और न्यायपालिका प्रमुख ने भी उन्हें निडर नेता बताया. लगातार हमलों से ईरान के नेतृत्व पर दबाव बढ़ा है और स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है.

आज तेहरान में सुप्रीम नेशनल सिक्युरिटी काउंसिल के प्रमुख अली लारीजानी के जनाजे में मानो पूरा ईरान उमड़ आया. युद्ध में अली खामेनेई के बाद लाराजानी का मारा जाना ईरान का सबसे बड़ा नुकसान है. ईरान लगातार नेतृत्वविहीन हो रहा है, और वाकई में घायल है. लेकिन लारीजानी की मौत के बावजूद अमेरिका के खिलाफ युद्ध में डटा हुआ है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक इंटरव्यू में साफ कहा कि लाराजानी की मौत से ईरान टूटा नहीं है, और अमेरिका को इसकी कीमत चुकानी होगी. इस बीच ईरान के खिलाफ और लेबनान में हिज्बुल्ला के खिलाफ भीषण प्रहार और बर्बादी के बावजूद राष्ट्रपति ट्रंप को नाटो देशों से निराशा हाथ लग रही है. युद्ध में किसी भी भूमिका में नाटो के उतरने से इनकार के बाद ट्रंप कह रहे हैं कि उन्हें नाटो की जरूरत नहीं.










