
जंग थमेगी या ईरान और हार्डलाइन होगा? फरीद जकारिया ने समझाया युद्ध आगे किस दिशा में बढ़ेगा
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इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध का असर पूरी दुनिया पर दिखाई दे रहा है. इन हमलों में तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को भी निशाना बनाया जा रहा है. अगर ये हमले इसी तरह जारी रहे, तो वैश्विक तेल कीमतों पर इसका भारी असर पड़ सकता है.
अमेरिका-इजरायल के ईरान पर संयुक्त हमलों के बाद से ही हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं और युद्ध के थमने की कोई संभावना दिखाई नहीं दे रही है. इस बीच भू-राजनीतिक एक्सपर्ट फरीद जकारिया ने मौजूदा संघर्ष पर कई अहम जानकारी दी है. जकारिया ने कहा इन हमलों से ईरान की लीडरशिप क्षमता कमजोर हो रही है. ऐसे हमले ईरानी शासन को और अधिक कठोर और सैन्यवादी रुख अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे, जिससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और तनाव और बढ़ सकता है. ऐसा लग रहा है कि इजरायल ईरानी सरकार के पूरे लीडरशीप को एक-एक करके निशाना बना रहा है. फरीद जकारिया ने कहा, "ऐसी संभावना है कि पूरा शासन ध्वस्त हो जाए, लेकिन आप जानते हैं कि सेना की संरचना में कई परतें होती हैं. कर्नल वहां जनरल बनने की प्रतीक्षा कर रहे होते हैं और लेफ्टिनेंट भी कर्नल बनने के इंतजार में हैं."
इसके नतीजों पर विस्तार से बताते हुए, जकारिया ने चेतावनी दी कि यह रणनीति संभावित समाधानों को कठिन बना देती है.अली लारीजानी के बाद होगी मुश्किल
जकारिया ने बताया कि अली लारीजानी जैसे प्रमुख नेगोशिएटर के चले जाने के बाद, जो पहले कतर और ओमान जैसे खाड़ी देशों के साथ ईरान के मुख्य वार्ताकार थे, अब संवाद के लिए भरोसेमंद व्यक्तियों को ढूंढना मुश्किल हो गया है.
जकारिया ने इजरायल और अमेरिका की रणनीति में सबसे बड़ा अंतर बताते हुए कहा कि जहां इजरायल का ध्यान शासन के प्रमुख व्यक्तियों को हटाने पर केंद्रित है, वहीं अमेरिका मुख्य रूप से सैन्य संपत्तियों को निशाना बनाता है.
उनके अनुसार, इस तरह अमेरिका बातचीत के लिए एक अवसर बनाए रखता है, जबकि इजरायल की रणनीति का नेतृत्व को कमजोर करने पर ज़्यादा फोकस है.
इज़रायली सचमुच शासन को जड़ से उखाड़ फेंकने की रणनीति पर काम कर रहे हैं. वहीं अमेरिकी ज्यादातर सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहे हैं. इसी वजह से यहां एक दिलचस्प अंतर दिखाई देता है. अमेरिकी शायद किसी तरह का बचाव या बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहते हैं, जबकि इजरायली इसे अभी बंद कर रहे हैं.

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