
तुलसी गबार्ड ने खोल दी ट्रंप के दावे की पोल? ईरान के परमाणु पर अमेरिका बड़ा कुबूलनामा
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अमेरिका की इंटेलिजेंस चीफ तुलसी गबार्ड के बयान ने ट्रंप प्रशासन के दावों को कटघरे में खड़ा कर दिया है. गबार्ड ने कहा कि 2025 के हमलों के बाद ईरान ने अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को दोबारा शुरू नहीं किया. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर खतरा नहीं था, तो फिर जंग क्यों शुरू की गई?
अमेरिका की इंटेलिजेंस चीफ तुलसी गबार्ड के एक बयान ने वॉशिंगटन की सियासत में हलचल मचा दी है. उनके इस खुलासे के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे पर सवाल उठने लगे हैं, जिसमें ईरान के न्यूक्लियर खतरे को जंग की बड़ी वजह बताया गया था.
गबार्ड ने सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी के सामने अपने लिखित बयान में कहा कि 2025 में अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने अपने परमाणु संवर्धन (न्यूक्लियर एनरिचमेंट) कार्यक्रम को दोबारा शुरू करने की कोई कोशिश नहीं की है. तुलसी गबार्ड ने बताया कि "ऑपरेशन मिडनाइट हैमर" के बाद ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम पूरी तरह तबाह हो गया था और तब से उसे फिर से खड़ा करने की कोई गतिविधि सामने नहीं आई.
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यह बयान सीधे तौर पर ट्रंप प्रशासन के उस तर्क को कमजोर करता है, जिसमें बार-बार कहा गया कि ईरान का न्यूक्लियर कार्यक्रम अमेरिका के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है. ट्रंप और उनके अधिकारी लगातार यह कहते रहे हैं कि ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षा को रोकने के लिए सैन्य कार्रवाई जरूरी थी. लेकिन गबार्ड के बयान के बाद बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि अगर ईरान ने अपना प्रोग्राम दोबारा शुरू ही नहीं किया, तो फिर जंग की जरूरत क्यों पड़ी?
ट्रंप के दावे के खिलाफ नहीं पढ़ा अपना बयान
इस पूरे मामले में एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि गबार्ड ने अपने सार्वजनिक बयान में इस हिस्से को नहीं पढ़ा. जब उनसे पूछा गया कि ऐसा क्यों किया गया, तो उन्होंने कहा कि समय की कमी की वजह से वह इसे पढ़ नहीं सकीं. हालांकि, उन्होंने अपने आकलन से इनकार नहीं किया. इस पर डेमोक्रेटिक सीनेटर मार्क वार्नर ने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने आरोप लगाया कि गबार्ड ने जानबूझकर उस हिस्से को छोड़ा, जो ट्रंप के दावों के खिलाफ जाता है.

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