
वेनेजुएला पर अचानक हमला कर ट्रंप ने रूस-चीन को दे दिया बड़ा मैसेज! भारत पर क्या होगा असर
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ट्रंप कोरोलरी के माध्यम से अमेरिका ने पश्चिमी गोलार्ध में अपनी सैन्य और राजनीतिक प्रभुत्व को मजबूत किया है. जनवरी 2026 में वेनेजुएला में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करना इस नीति का प्रमुख उदाहरण है. यह रणनीति चीन और रूस जैसे बाहरी प्रतिद्वंद्वियों को क्षेत्र से बाहर रखने और महत्वपूर्ण संसाधनों पर कंट्रोल के मकसद से बनाई गई है.
दिसंबर 2025 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने औपचारिक रूप से अपनी नई राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति को मंजूरी दी. इसे ‘ट्रंप कोरोलरी (Trump Corollary)’ नाम दिया गया. अमेरिका की यह नई राष्ट्रीय सुरक्षा नीति पिछले सौ साल में पहली बार पश्चिमी गोलार्ध में उसकी ताकत दिखाने की सबसे आक्रामक कोशिश मानी जा रही है.
इसका प्रभाव सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लैटिन अमेरिका से लेकर रूस और चीन तक, पूरी दुनिया की राजनीति पर लंबे समय तक दिखाई दे सकता है.
वेनेजुएला पर ट्रंप का अभूतपूर्व कब्जा इसी नई नीति का प्रत्यक्ष नतीजा माना जा रहा है, इसलिए इस पर गंभीरता से ध्यान देना जरूरी है.
यह 1823 की मूल मुनरो डॉक्ट्रिन और बाद में आई रूजवेल्ट कोरोलरी पर आधारित है. इसके तहत अमेरिका को 'इंटरनेशनल पुलिस पावर' की भूमिका दी जाती है और पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिकी सर्वोच्चता को राष्ट्रीय सुरक्षा की अनिवार्य शर्त बताया जाता है.
3 जनवरी 2026 को अमेरिकी सैनिकों ने वेनेजुएला में एक टार्गेटेड मिलिट्री ऑपरेशन चलाया. इस ऑपरेशन के तहत वेनेजुएला के बंदरगाहों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर हवाई हमले किए गए, जिसके बाद स्पेशल फोर्सेज ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में ले लिया.
अमेरिकी न्याय विभाग ने 2020 में मादुरो पर नार्को-टेररिज्म के आरोप लगाए थे. ट्रंप प्रशासन ने मादुरो के खिलाफ इस कार्रवाई को ड्रग कार्टेल से जुड़े एक शासन के खिलाफ निर्णायक कदम बताया.

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