
विश्वास मत तो हासिल हो गया पर कुछ भी ठीक नहीं है बिहार में नीतीश और बीजेपी के लिए
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जिन लोगों ने सोमवार को बिहार विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर होने वाली बहस देखी होगी उन्हें पता होगा कि सत्तारूढ़ पक्ष में वो खुशी नजर नहीं आ रही थी जो एक विजयी के चेहरे पर होता है.
बिहार में नीतीश कुमार के लिए पाला बदलना हमेशा बहुत आसान रहा है. पर इस बार यह उनके लिए कितना मुश्किल हो गया था यह विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव के समय उनकी भाव भंगिमाएं बता रहीं थीं. फिलहाल कठिन परिश्रम की बदौलत कुर्सी तो बच गई पर दुनिया जान गई कि बिहार में बीजेपी और जेडीयू के अंदर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. दोनों सत्तारूढ़ दलों के विधायकों में जबरदस्त असंतोष है. जेडीयू और बीजेपी दोनों दलों के विधायकों ने पार्टी नेतृत्व को जिस तरह चकमा दिया वो कोई सोच नहीं सकता था. ठीक इसके विपरीत कांग्रेस के विधायक और आरजेडी के विधायक अपने नेतृत्व के साथ दिखे. इस तरह यह अविश्वास प्रस्ताव यह संदेश दे गया कि नीतीश कुमार और बीजेपी के लिए आने वाले लोकसभा चुनावों में रास्ता इतना आसान नहीं है जितना एनडीए गठबंधन समझ रहा है.
1-केंद्र और राज्य में सरकार के बावजूद बगावत करने पर उतारू थे विधायक
बहुत सीधा सवाल है कि आखिर वे क्या कारण रहे कि बीजेपी और जेडीयू के विधायक अविश्वास प्रस्ताव पर सरकार के साथ नजर नहीं आ रहे थे. बीमा भारती नीतीश सरकार में मंत्री रह चुकी हैं. आखिर उन्हें सरकार का साथ नहीं देने में क्यों भलाई नजर आ रही थी. कोई सत्तारूढ दल का विधायक अगर किसी और दल के साथ क्यों जाना चाहेगा ? जाहिर है जब उसे दूसरे दल का भविष्य उज्ज्वल नजर आ रहा होगा. बताया जा रहा है कि अविश्वास प्रस्ताव के दिन सवा दो बजे करीब वो विधानसभा पहुंची. इसके पहले विजय चौधरी के घर विधायक दल की बैठक में नहीं थी. यही नहीं श्रवण कुमार के यहां भोज में नहीं पहुंची.शायद वो अविश्वास प्रस्ताव से दूर ही रहतीं अगर पति और बेटे पर पुलिस का दबाव नहीं होता. बिहार के वरिष्ठ पत्रकारों के सोशल मीडिया पोस्ट ये बताते हैं कि बीमा भारती को पुलिस ने मोकामा में डिटेन किया और संजीव कुमार को नवादा में डिटेन किया गया था.
सबसे बड़ी बात यह थी कि बीजेपी जैसी पार्टी जो अपने अनुशासन के लिए प्रसिद्ध है वहां से भी असंतोष की खबरें मिलीं. सोचिए जिस दल की सबसे अधिक हवा है, अगर उसके 3 विधायकों को बड़ी मुश्किल से विधानसभा में लाया गया. ये क्या संदेश देता है. भागीरथी देवी और रश्मि वर्मा को गोरखपुर से किसी तरह से लाया गया. कहा जा रहा है कि मिश्रीलाल यादव भी परिवार के दबाव में बाहर आए. कांग्रेस विधायकों के बारे में कहा जाता रहा है कि उनके टूटने के चांसेस सबसे ज्यादा हैं. पर हुआ उल्टा . आरजेडी, जेडीयू और बीजेपी के विधायकों में अंसतोष दिखा . कांग्रेस के विधायक मजबूती से अपनी पार्टी के साथ डटे हुए थे.
बीजेपी विधायक रश्मि वर्मा, मिश्रीलाल यादव, भागीरथी देवी ने जिस तरह से सुबह तक बीजेपी की किरकिरी करवाई उससे सम्राट चौधरी जो कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष की भी बदनामी हुई है.
2-कांग्रेस के विधायक नहीं टूटे, आरजेडी भी अपेक्षाकृत मजबूत दिखी

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