
विवाद के बीच एआर रहमान के बच्चों ने चुप्पी तोड़ी, दोनों बेटियों का मिला साथ, लिखी ये बात
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कैलाश मेनन के संगीतकार एआर रहमान की आलोचना करने वालों को जमकर सुनाया है. इसके बाद पहली बार विवादों के बीच एआर रहमान की बेटियों खतीजा और रहीमा ने अपने पिता के सपोर्ट में बात की है.
हाल ही में म्यूजिक कंपोजर एआर रहमान ने फिल्म इंडस्ट्री को लेकर बड़ा बयान दिया था. पहले उन्होंने छावा फिल्म को बांटने वाली कह दिया और फिर कहा कि बॉलीवुड में सांप्रदायिकता का प्रभाव बढ़ रहा है. जिसके बाद देशभर में रहमान को आलोचना का सामना करना पड़ा. अब इन सब के बीच उनकी बेटियों खतीजा और रहीमा ने अपनी चुप्पी तोड़ी है.
दरअसल मलयालम म्यूजिक कंपोजर कैलाश मेनन ने अपने इंस्टाग्राम पर एक लंबा नोट लिखकर लोगों से एआर रहमान से 'असहमत होने, अपमान न करने' के लिए कहा. इसे रहमान की दोनों बेटियों की तरफ से सपोर्ट मिला है.
कैलाश मेनन ने क्या लिखा? म्यूजिक कंपोजर कैलाश ने एक कमेंट का स्क्रीनग्रैब पोस्ट किया. जिसमें रहमान को 'तमिलनाडु और भारत के लिए शर्म की बात' कहा गया था. इस पर अपनी राय शेयर करते हुए, उन्होंने लिखा, 'असहमत हो, अपमान न करें. जो लोग एआर रहमान को अपनी बात कहने के लिए दोषी ठहरा रहे हैं, वे एक बुनियादी बात भूल रहे हैं. उन्होंने बताया कि उन्हें कैसा महसूस हुआ. यह उनका अधिकार है.'
म्यूजिक कंपोजर ने आगे कहा कि रहमान को अपना अनुभव शेयर करने की स्वतंत्रता है, और कहा, 'आप उनसे असहमत हो सकते हैं, लेकिन आप उन्हें अपना अनुभव व्यक्त करने की स्वतंत्रता से वंचित नहीं कर सकते. हालांकि, इसके बाद जो हुआ, वह असहमति से कहीं आगे निकल गया है और गाली-गलौज और चरित्र हनन के दायरे में आ गया है.'
कैलाश ने आलोचना की आड़ में रहमान को गाली देने वालों से सवाल करते हुए लिखा, 'एक विश्व स्तर पर सम्मानित कलाकार को 'शर्म की बात' कहना, उसके विश्वास पर सवाल उठाना, उसके हाल के कामों का मजाक उड़ाना, और उसके जीवन के अनुभव को 'विक्टिम कार्ड' तक सीमित करना आलोचना नहीं है. यह राय के रूप में पेश किया गया नफरत भरा भाषण है.'
उन्होंने लोगों को यह भी याद दिलाया कि रहमान 'कोई आम आवाज नहीं' हैं, बल्कि ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने भारतीय संगीत को दुनिया तक पहुंचाया, देश का सम्मान के साथ प्रतिनिधित्व किया, और अपने काम से पीढ़ियों को आकार दिया. तमिल संस्कृति, भारतीय सिनेमा और वैश्विक संगीत में दशकों का योगदान इसलिए खत्म नहीं हो जाता क्योंकि एक कलाकार व्यक्तिगत राय व्यक्त करता है. उन्होंने लिखा, 'आप किसी फिल्म पर उनकी राय पर बहस कर सकते हैं. आप उनकी व्याख्या से असहमत हो सकते हैं. यह ठीक है. जो ठीक नहीं है वह है सार्वजनिक अपमान या उन्होंने जो कहा उसे चुप कराने के लिए उनकी ईमानदारी पर हमला करना, बोलने की स्वतंत्रता रहमान पर उतनी ही लागू होती है जितनी उनके आलोचकों पर.'

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